एक Chief Minister कब पद छोड़ता है? संवैधानिक प्रावधान और कानूनी मिसालें
यह लेख एक Chief Minister (CM) के कार्यकाल के संबंध में संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी मिसालों की जांच करता है, विशेष रूप से जब वे Legislative Assembly का विश्वास खोने के कारण पद छोड़ते हैं। जबकि Article 164 कहता है कि एक CM "during the pleasure of the Governor" पद धारण करता है, यह पूर्ण नहीं है, Assembly का विश्वास बनाए रखने पर आकस्मिक है। Governor एक CM को हटा सकता है जिसने विश्वास खो दिया है, लेकिन CM को floor test के माध्यम से अपना बहुमत साबित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। लेख इस बात पर जोर देता है कि विश्वास की अंतिम परीक्षा सदन के पटल पर होती है, न कि Governor के व्यक्तिपरक मूल्यांकन पर, और Assembly को बुलाने में Governor की भूमिका पर चर्चा करता है।
मुख्य बिंदु
- एक Chief Minister "during the pleasure of the Governor" पद धारण करता है, लेकिन यह Legislative Assembly का विश्वास बनाए रखने पर सशर्त है।
- Governor एक CM को हटा सकता है जिसने विश्वास खो दिया है, लेकिन CM को floor test के माध्यम से अपना बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
- CM के बहुमत का निर्धारण करने में floor test के लिए Assembly को बुलाने की Governor की शक्ति महत्वपूर्ण है।
- CM का कार्यकाल निश्चित नहीं है और विश्वास खोने, इस्तीफे या अयोग्यता के कारण समय से पहले समाप्त हो सकता है।
- कानूनी मिसालें पुष्टि करती हैं कि विश्वास की अंतिम परीक्षा सदन के पटल पर होनी चाहिए, न कि Governor के विवेक के आधार पर।
परीक्षा तथ्य
- संविधान का Article 164 कहता है कि CM "during the pleasure of the Governor" पद धारण करता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि CM को हटाने की Governor की शक्ति पूर्ण नहीं है।
- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि Governor के फैसले के 24 घंटे के भीतर floor test आयोजित किया जाना चाहिए।
- लेख में Trinamool Congress नेता Mamata Banerjee का संबंधित संदर्भ में उल्लेख है।
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