CJI ने मूल सबरीमाला PIL के लोकस और इरादे पर सवाल उठाया, कहा इसे 'कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए था'
2018 के सबरीमाला फैसले से संबंधित समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई के दौरान, Chief Justice of India Surya Kant की अध्यक्षता वाली नौ-न्यायाधीशों की सुप्रीम कोर्ट पीठ ने मूल याचिकाकर्ता, Indian Young Lawyers Association (IYLA) के लोकस स्टैंडी और इरादे पर गंभीर सवाल उठाए। CJI Kant ने टिप्पणी की कि PIL को 'सीधे कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए था', जबकि Justice M.M. Sundresh ने इसे 'कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग' बताया। पीठ ने पारसी महिलाओं को धर्म के बाहर शादी करने पर अग्नि मंदिरों में प्रवेश से रोकने की प्रथा पर भी सवाल उठाया, इसे Article 25(1) के तहत अंतरात्मा की स्वतंत्रता से जोड़ा।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट पीठ ने सबरीमाला मामले में मूल याचिकाकर्ता के लोकस स्टैंडी और इरादे पर सवाल उठाया।
- CJI Surya Kant ने कहा कि मूल PIL को 'सीधे कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए था'।
- Justice M.M. Sundresh ने याचिका दायर करने को 'कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग' बताया।
- पीठ ने पारसी महिलाओं को धर्म के बाहर शादी करने पर अग्नि मंदिरों में प्रवेश से रोकने के मुद्दे पर भी विचार किया।
- अदालत ने जोर दिया कि Article 25(1) के तहत अंतरात्मा की स्वतंत्रता एक जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे विवाह द्वारा छीना नहीं जा सकता।
परीक्षा तथ्य
- मूल सबरीमाला फैसला: 28 सितंबर, 2018 (पांच-न्यायाधीशों की पीठ, 4-1 का फैसला)
- वर्तमान सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों की पीठ
- Chief Justice of India: Surya Kant
- चर्चा किया गया संवैधानिक अनुच्छेद: Article 25(1) (अंतरात्मा की स्वतंत्रता)
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