SC ने बंगाल में कानून के शासन के उल्लंघन के ED के दावे पर सवाल उठाया; Solicitor-General ने रुख स्पष्ट किया

सुप्रीम कोर्ट ने Directorate of Enforcement (ED) से सवाल किया कि क्या वह पश्चिम बंगाल में "संवैधानिक मशीनरी के टूटने" के लिए तर्क दे रहा था, जिससे मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एजेंसी की जवाबी कार्रवाई क्षण भर के लिए रुक गई। ED ने कोयला तस्करी मामले से संबंधित एक छापे के दौरान कानून के शासन के उल्लंघन का आरोप लगाया था, जिसमें मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ Trinamool Congress द्वारा उल्लंघनों के "सुस्थापित पैटर्न" का हवाला दिया गया था। Solicitor-General Tushar Mehta ने स्पष्ट किया कि ED Article 356 (President's Rule) के लिए तर्क नहीं दे रहा था, बल्कि अपने अधिकारियों के कानून के समक्ष समानता के मौलिक अधिकारों पर जोर दे रहा था।

मुख्य बिंदु

  • सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में "संवैधानिक मशीनरी के टूटने" के संबंध में ED के तर्क पर सवाल उठाया।
  • ED के प्रस्तुतीकरण ने मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस द्वारा कानून के शासन के उल्लंघनों के "सुस्थापित पैटर्न" पर प्रकाश डाला।
  • Solicitor-General Tushar Mehta ने स्पष्ट किया कि ED अपने अधिकारियों के मौलिक अधिकारों पर जोर दे रहा था, न कि President's Rule की मांग कर रहा था।
  • यह मामला कोयला तस्करी मामले से संबंधित ED के छापे के दौरान कथित उल्लंघनों से जुड़ा है।
  • पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने पहले Article 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

परीक्षा तथ्य

  • सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश: N.V. Anjaria, Prashant Kumar Mishra
  • Solicitor-General: Tushar Mehta
  • संवैधानिक अनुच्छेद: Article 356 (President's Rule), Article 32 (writ petition), Article 131 (original suit for Centre-State disputes)
  • केंद्रीय एजेंसियां: Directorate of Enforcement (ED), Central Bureau of Investigation (CBI)

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