मद्रास HC ने फैसला सुनाया कि राज्यपाल क्षमादान शक्तियों पर कैबिनेट की सलाह मानने को बाध्य हैं
मद्रास हाई कोर्ट की एक Full Bench ने फैसला सुनाया कि संविधान के Article 161 के तहत दोषियों की क्षमादान और समय से पहले रिहाई से संबंधित शक्तियों का प्रयोग करते समय राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह मानने को बाध्य हैं। Justices A.D. Jagadish Chandira, G.K. Ilanthiraiyan और Sunder Mohan की Bench ने कहा कि राज्यपाल के पास अलग राय लेने का कोई विवेक नहीं है। इस निर्णय ने अन्य Division Benches के परस्पर विरोधी निर्णयों को सुलझाया, यह पुष्टि करते हुए कि यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की 1980 की Constitution Bench द्वारा Maru Ramu के मामले में तय किया गया था, जिसका पालन A.G. Perarivalan मामले में भी किया गया था।
मुख्य बिंदु
- मद्रास हाई कोर्ट की Full Bench ने पुष्टि की कि राज्यपाल को Article 161 के तहत क्षमादान शक्तियों के लिए मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना चाहिए।
- यह फैसला स्पष्ट करता है कि ऐसे मामलों में कैबिनेट की सलाह से विचलित होने की राज्यपाल के पास कोई विवेकाधीन शक्ति नहीं है।
- इस निर्णय ने हाई कोर्ट की अन्य Division Benches से परस्पर विरोधी व्याख्याओं को सुलझाया।
- Full Bench ने Maru Ramu के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1980 के Constitution Bench के फैसले और 2022 के A.G. Perarivalan मामले पर भरोसा किया।
परीक्षा तथ्य
- संवैधानिक अनुच्छेद: Article 161 (राज्यपाल की क्षमादान आदि देने और सजा को निलंबित करने, माफ करने या कम करने की शक्ति)।
- मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश: A.D. Jagadish Chandira, G.K. Ilanthiraiyan, Sunder Mohan।
- सुप्रीम कोर्ट के मामले: Maru Ramu's case (1980 Constitution Bench), A.G. Perarivalan case (2022)।
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