अकेले माता-पिता की आय creamy layer का दर्जा तय नहीं कर सकती
Supreme Court ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण के लिए OBC उम्मीदवारों के creamy layer का दर्जा तय करने के लिए अकेले माता-पिता की आय एकमात्र मानदंड नहीं हो सकती है। अदालत ने फैसला सुनाया कि आय/धन परीक्षण लागू करते समय वेतन और कृषि भूमि से माता-पिता की आय को बाहर रखा जाना चाहिए। इस निर्णय से वरिष्ठ सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों के बच्चों को शामिल करके आरक्षण पूल का विस्तार होने की उम्मीद है, जिन्हें पहले उनके माता-पिता के वार्षिक वेतन ₹8 लाख से अधिक होने के आधार पर बाहर रखा गया था। फैसले में इस बात पर जोर दिया गया है कि creamy layer बहिष्करण मानदंड विशुद्ध रूप से आय-आधारित होने के बजाय 'status-based' हैं, जो सरकारी सेवा पदानुक्रम के माध्यम से सामाजिक प्रगति को दर्शाते हैं।
मुख्य बिंदु
- Supreme Court ने फैसला सुनाया कि OBC उम्मीदवारों के लिए creamy layer का दर्जा तय करने के लिए अकेले माता-पिता की आय अपर्याप्त है।
- creamy layer के लिए आय/धन परीक्षण लागू करते समय माता-पिता के वेतन और कृषि भूमि से होने वाली आय को बाहर रखा जाना चाहिए।
- इस फैसले से OBCs के लिए आरक्षण पूल का विस्तार होने की उम्मीद है, जिससे वरिष्ठ सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों के बच्चों को लाभ होगा।
- अदालत ने जोर दिया कि creamy layer बहिष्करण मानदंड 'status-based' हैं, जो केवल आय स्तरों को नहीं, बल्कि सामाजिक प्रगति को दर्शाते हैं।
- Department of Personnel and Training (DoPT) के 1993 के चार्टर ने कुछ OBC परिवारों को व्यवसायों और संवैधानिक पदों के आधार पर अपात्र घोषित किया था।
परीक्षा तथ्य
- Supreme Court का फैसला Justices P.S. Narasimha और R. Mahadevan की पीठ ने सुनाया।
- OBC आरक्षण से बहिष्करण के लिए माता-पिता के वार्षिक वेतन की पिछली सीमा ₹8 लाख थी।
- OBC कोटा 1993 में creamy layer को बाहर करने के लिए एक मार्गदर्शक चार्टर के साथ पेश किया गया था।
- DoPT ने अक्टूबर 2004 में आय परीक्षण आवेदन के संबंध में एक स्पष्टीकरण पत्र जारी किया था।
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