भारत की नारियल खेती में उत्पादकता से स्थिरता (Sustainability) की ओर ध्यान केंद्रित करना
2026-27 के केंद्रीय बजट में पुराने बगीचों के कायाकल्प और खेती के विस्तार के लिए 'Coconut Promotion Scheme' की घोषणा की गई। हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि ध्यान केवल उत्पादकता से हटकर जलवायु-लचीली स्थिरता (climate-resilient sustainability) की ओर होना चाहिए। भारत नारियल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, लेकिन उद्योग को बढ़ते तापमान और रूट विल्ट (root wilt) जैसी बीमारियों से खतरों का सामना करना पड़ रहा है। लेख सुझाव देता है कि Coconut Development Board (CDB) को केवल पौध वितरित करने के बजाय सूखा-सहिष्णु जीनोटाइप विकसित करने और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बढ़ावा देने को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह उच्च निवेश बाधाओं और किसानों के लिए संस्थागत आवाज की कमी के कारण पिछले क्लस्टर विकास कार्यक्रमों की विफलता पर भी प्रकाश डालता है।
मुख्य बिंदु
- 'Coconut Promotion Scheme' का उद्देश्य गैर-उत्पादक बगीचों का कायाकल्प करना और नए वृक्षारोपण स्थापित करना है।
- जलवायु परिवर्तन एक महत्वपूर्ण खतरा है, अनुमानों के अनुसार 2050 तक नारियल उगाने वाले क्षेत्रों में तापमान 1.6-2.1°C तक बढ़ सकता है।
- स्थिरता के लिए जलवायु-लचीली, नमक-सहिष्णु और रोग-प्रतिरोधी नारियल की किस्मों के विकास की आवश्यकता है।
- Coconut Development Board (CDB) नारियल उद्योग में मूल्यवर्धन के लिए 25% पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करता है।
- किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को छोटे किसानों को संस्थागत आवाज और बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए आवश्यक माना जाता है।
परीक्षा तथ्य
- भारत नारियल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है।
- 'Coconut Promotion Scheme' की घोषणा 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी।
- Coconut Development Board (CDB) भारत में नारियल उद्योग के विकास के लिए प्राथमिक निकाय है।
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