आदिवासी महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों और Hindu Succession Act पर Supreme Court का निर्णय
Supreme Court ने हाल ही में पुष्टि की है कि Hindu Succession Act, 1956, Scheduled Tribes पर लागू नहीं होता है, जो स्वदेशी रीति-रिवाजों को विशेष सुरक्षा प्रदान करने के कानूनी सिद्धांत की पुष्टि करता है। Nawang v. Bahadur के मामले में, अदालत ने High Court के उस आदेश को पलट दिया जिसने उन आदिवासी महिलाओं को उत्तराधिकार का अधिकार दिया था जो 'हिंदू' बन गई थीं। यह फैसला अधिनियम की Section 2(2) की संवैधानिक वैधता की पुष्टि करता है, जो Scheduled Tribes को बाहर रखती है। हालांकि यह प्रथागत कानूनों की रक्षा करता है, लेकिन यह कई आदिवासी महिलाओं को पूर्ण संपत्ति अधिकारों के बिना छोड़ देता है, जिससे आदिवासी पहचान को बनाए रखते हुए लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए एक अलग कानून की मांग उठ रही है।
मुख्य बिंदु
- Hindu Succession Act, 1956 की Section 2(2) विशेष रूप से Scheduled Tribes को इसके दायरे से बाहर रखती है।
- Supreme Court ने फैसला सुनाया कि न्यायपालिका नहीं, बल्कि संसद के पास इस अधिनियम को आदिवासी समुदायों तक विस्तारित करने का अधिकार है।
- कई आदिवासी समुदायों में प्रथागत कानून महिलाओं को पूर्ण संपत्ति के अधिकार से वंचित करते हैं, जिससे एक कानूनी अंतर पैदा होता है।
- निर्णय इस बात पर जोर देता है कि आदिवासी पहचान तब भी बनी रहती है जब सदस्य कुछ हिंदू रीति-रिवाजों को अपनाते हैं या धर्म परिवर्तन करते हैं।
परीक्षा तथ्य
- मामले का नाम: Nawang v. Bahadur (Supreme Court, 8 अक्टूबर, 2025)।
- प्रासंगिक कानून: Hindu Succession Act, 1956 की Section 2(2)।
- मिजोरम को एक ऐसे राज्य के रूप में उद्धृत किया गया है जिसने उत्तराधिकार के प्रथागत कानूनों को संहिताबद्ध किया है।
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