Election Commission की स्वतंत्रता की रक्षा: संवैधानिक प्रावधान और हालिया चुनौतियां
Election Commission (EC) की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है, जिसे संविधान के Article 324 द्वारा संरक्षित किया गया है। Chief Election Commissioner (CEC) और अन्य ECs की नियुक्ति को नियंत्रित करने वाले 2023 Act के संबंध में हालिया विवाद उभरे हैं। आलोचकों का तर्क है कि नई चयन समिति, जिसमें PM, एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हैं, SC के Anoop Baranwal फैसले को कमजोर करती है। लेख एक स्थायी EC के लिए संवैधानिक जनादेश और CEC के लिए कठोर निष्कासन प्रक्रिया पर चर्चा करता है, जो Supreme Court के न्यायाधीश के समान है, जो मनमानी कार्यकारी कार्रवाई से सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
मुख्य बिंदु
- Article 324 चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्तियों के साथ एक स्थायी Election Commission का प्रावधान करता है।
- CEC को केवल Supreme Court के न्यायाधीश के समान तरीके (महाभियोग) से ही पद से हटाया जा सकता है।
- 2023 Act ने ECs के लिए चयन प्रक्रिया को बदल दिया, जिसे वर्तमान में Supreme Court में चुनौती दी जा रही है।
- 'Rule of Fair Hearing' और अर्ध-न्यायिक प्रक्रियाएं EC के कामकाज और जनता के विश्वास के लिए आवश्यक हैं।
परीक्षा तथ्य
- Article 324: Election Commission के लिए संवैधानिक प्रावधान।
- Anoop Baranwal v. Union of India (2023): EC नियुक्तियों पर ऐतिहासिक SC मामला।
- 2023 Act: Chief Election Commissioner and other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act।
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