US Supreme Court ने IEEPA के तहत टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति की शक्ति को सीमित किया
U.S. Supreme Court (SCOTUS) ने 6-3 से फैसला सुनाया कि स्पष्ट संसदीय प्राधिकरण (congressional authorization) के बिना टैरिफ लगाने के लिए राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का उपयोग गैरकानूनी था। कोर्ट ने पाया कि IEEPA कार्यपालिका को इस हद तक कर लगाने या व्यापार को विनियमित करने की शक्ति नहीं देता है। यह फैसला भारत सहित विभिन्न देशों को प्रभावित करता है, जिसे रूसी तेल की खरीद से जुड़े 50% टैरिफ वृद्धि का सामना करना पड़ा था। हालांकि अन्य कानूनों के तहत कुछ मौजूदा टैरिफ बने हुए हैं, यह फैसला व्यापार नीति में कार्यपालिका के अतिरेक पर एक महत्वपूर्ण अंकुश लगाता है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं पर दबाव कम होने की संभावना है।
मुख्य बिंदु
- यह फैसला विधायी निरीक्षण के बिना असीमित टैरिफ लगाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करने की राष्ट्रपति की क्षमता को प्रतिबंधित करता है।
- कोर्ट ने कार्यपालिका द्वारा कराधान जैसी आर्थिक शक्तियों का प्रयोग करने के लिए 'स्पष्ट संसदीय प्राधिकरण' (clear congressional authorization) की आवश्यकता पर जोर दिया।
- नई दिल्ली द्वारा रूस से तेल खरीदने पर वाशिंगटन की आपत्तियों के कारण भारत को विशेष रूप से उच्च टैरिफ के साथ लक्षित किया गया था।
- यह निर्णय घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अनुमेय नीतिगत कार्यों के दायरे को सीमित करके लोकतांत्रिक नियंत्रण और संतुलन (checks and balances) को मजबूत करता है।
परीक्षा तथ्य
- 6-3 SCOTUS फैसले में International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) जांच के दायरे में प्राथमिक कानून था।
- Trade Act of 1974 की Section 122 और Trade Expansion Act of 1962 की Section 232 टैरिफ के लिए वैकल्पिक कानूनी मार्ग हैं।
- पिछली कार्यकारी कार्रवाइयों के तहत भारत को 50% की भारी कुल टैरिफ दर का सामना करना पड़ा था।
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