Supreme Court ने RTI और DPDP Act के बीच संघर्ष को Constitution Bench को भेजा

भारत के Supreme Court ने Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 द्वारा RTI Act की Section 8(1)(j) में किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को Constitution Bench को भेज दिया है। यह संशोधन 'public interest override' को हटा देता है, जो पहले व्यापक जनहित में व्यक्तिगत जानकारी के प्रकटीकरण की अनुमति देता था। आलोचकों का तर्क है कि यह अधिकारियों और सार्वजनिक खर्च से संबंधित जानकारी पर 'blanket ban' लगाता है, जिससे राज्य और नागरिकों के बीच सूचना की विषमता पैदा होती है। अदालत इन बदलावों की 'constitutional sensitivity' और पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक जवाबदेही पर उनके प्रभाव की जांच करेगी।

मुख्य बिंदु

  • DPDP Act 2023, RTI Act 2005 में संशोधन करता है, जो प्रभावी रूप से किसी भी व्यक्तिगत जानकारी के प्रकटीकरण को प्रतिबंधित करता है।
  • एक Constitution Bench 'personal information' को परिभाषित करेगी और public interest override को हटाने की वैधता का आकलन करेगी।
  • नए नियमों के तहत पत्रकारों को 'data fiduciaries' के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिन्हें अनुपालन न करने पर ₹250 crore तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
  • संशोधन की आलोचना इसलिए की जा रही है क्योंकि यह राज्य को बिना सहमति के नागरिक डेटा संसाधित करने की अनुमति देता है, जबकि नागरिकों को सरकार की जांच करने की क्षमता से वंचित करता है।

परीक्षा तथ्य

  • Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 की Section 44(3)।
  • Right to Information (RTI) Act, 2005 की Section 8(1)(j)।
  • DPDP Act के प्रावधानों के तहत अनुपालन न करने पर ₹250 crore का अधिकतम जुर्माना।

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