AYUSH के लिए प्रमुख बजटीय प्रोत्साहन और इसके वैश्विक एकीकरण की संभावनाओं का विश्लेषण
2026-27 के Union Budget ने AYUSH Ministry के लिए आवंटन को बढ़ाकर ₹4,408 करोड़ कर दिया है, जो पारंपरिक चिकित्सा की ओर एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। प्रमुख पहलों में तीन नए All-India Institutes of Ayurveda की स्थापना और औषधीय पौधों के किसानों के लिए Bharat-VISTAAR AI सहायक शामिल हैं। बजट अस्पतालों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं के उन्नयन पर भी केंद्रित है। इसके अलावा, India-EU Free Trade Agreement (FTA) से भारतीय योग्यताओं और सुरक्षा प्रमाणपत्रों को मान्यता देकर AYUSH चिकित्सकों और उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार खुलने की उम्मीद है। हालांकि, वैज्ञानिक सत्यापन और कुछ पारंपरिक फॉर्मूलेशन में भारी धातुओं की उपस्थिति के संबंध में चुनौतियां बनी हुई हैं।
मुख्य बिंदु
- 2026-27 वित्तीय वर्ष में AYUSH Ministry के बजट में ₹4,408 करोड़ की पर्याप्त वृद्धि देखी गई।
- पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के लिए वैश्विक मानक स्थापित करने के लिए तीन नए AIIMS जैसे आयुर्वेद संस्थानों की योजना है।
- Bharat-VISTAAR AI सहायक औषधीय पौधे उगाने वाले किसानों को रीयल-टाइम सलाह देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- India-EU FTA भारतीय पारंपरिक चिकित्सा चिकित्सकों को 27 EU देशों में काम करने के लिए कानूनी गारंटी प्रदान करता है।
- इस क्षेत्र के 2026 तक 26.5 बिलियन डॉलर (₹2.3 लाख करोड़) के मूल्यांकन तक पहुंचने का अनुमान है।
परीक्षा तथ्य
- AYUSH के लिए बजट आवंटन बढ़कर ₹4,408 करोड़ हो गया (2025-26 में ₹3,992 करोड़ से अधिक)।
- National AYUSH Mission के बजट में 66% की वृद्धि कर इसे ₹1,300 करोड़ कर दिया गया।
- AYUSH क्षेत्र के 2026 तक 26.5 बिलियन डॉलर मूल्य का होने का अनुमान है।
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