भारत की जलवायु महत्वाकांक्षाएं और डीकार्बोनाइजेशन और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए बजटीय आवंटन

लेख भारत के हालिया केंद्रीय बजटों का विश्लेषण करता है, जो 2021 से जलवायु-सचेत आवंटन की ओर बदलाव को उजागर करता है। प्रमुख पहलों में Carbon Capture, Utilisation and Storage (CCUS) के लिए ₹20,000 करोड़ का परिव्यय और रूफटॉप सोलर के लिए PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana का विस्तार शामिल है। हालांकि, लेखक औद्योगिक स्तर पर तैनाती के प्रति सतर्क दृष्टिकोण नोट करते हैं। EU का Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) भारतीय स्टील और एल्युमीनियम के लिए डीकार्बोनाइजेशन को निर्यात प्रतिस्पर्धा का मामला बनाता है। सोलर और परमाणु ऊर्जा में प्रगति के बावजूद, निजी पूंजी जुटाने और ग्रीन हाइड्रोजन नीतियों को लागू करने में अंतराल बना हुआ है।

मुख्य बिंदु

  • बजट CCUS तकनीक के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित करता है, जो पायलट-चरण के औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन की ओर कदम का संकेत देता है।
  • विकेंद्रीकृत ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 2026-27 के लिए PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana को ₹22,000 करोड़ तक महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला।
  • EU का Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) उच्च-उत्सर्जन आयात पर कार्बन लागत लगाता है, जिससे भारतीय उद्योगों पर डीकार्बोनाइज करने का दबाव पड़ता है।
  • परमाणु ऊर्जा में इनपुट लागत कम करने के लिए 2035 तक उपकरणों के आयात पर सीमा शुल्क (customs duty) छूट का विस्तार देखा गया है।

परीक्षा तथ्य

  • Carbon Capture, Utilisation and Storage (CCUS) के लिए ₹20,000 करोड़ का परिव्यय।
  • 2026-27 में PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana का आवंटन बढ़ाकर ₹22,000 करोड़ किया गया।
  • परमाणु संयंत्र उपकरणों के आयात पर सीमा शुल्क (customs duty) 2035 तक बढ़ाया गया।

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