Supreme Court ने Article 15 के जनादेश पर जोर देते हुए UGC Equity Rules पर रोक लगाई

Supreme Court ने हाल ही में UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 पर रोक लगा दी, उन्हें 'बहुत व्यापक' (too sweeping) बताया। हालांकि, कानूनी विश्लेषण इस बात को रेखांकित करता है कि ये नियम Constitution के Article 15 से उत्पन्न हुए हैं, जो State को हाशिए पर रहने वाले समुदायों द्वारा सामना किए गए ऐतिहासिक अन्यायों को दूर करने का आदेश देता है। जबकि मसौदा नियमों का उद्देश्य परिसरों में बढ़ते जाति-आधारित भेदभाव को संबोधित करना था, आलोचकों का तर्क है कि वे 'Reverse Discrimination' का कारण बन सकते हैं। कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या नियमों में भेदभाव की परिभाषा का HEIs में पूर्ण समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उचित संबंध है।

मुख्य बिंदु

  • Higher Education Institutions (HEIs) में जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतें पिछले पांच वर्षों में दोगुनी से अधिक हो गई हैं।
  • Article 15(1) और 15(2) भेदभाव को प्रतिबंधित करने और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक आधार प्रदान करते हैं।
  • Sukanya Shantha Case ने ऐतिहासिक अन्यायों को सुधारने के लिए Substantive Equality के सिद्धांत को स्थापित किया।
  • कोर्ट 'Reverse Discrimination' और 'झूठी शिकायतों' की चिंताओं के साथ भेदभाव विरोधी उपायों की आवश्यकता को संतुलित कर रहा है।

परीक्षा तथ्य

  • Constitution का Article 15 (भेदभाव का निषेध)।
  • UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026।
  • Sukanya Shantha Case (जेलों में जातिगत भेदभाव पर SC का फैसला)।

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