हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करने के प्रवर्तन निदेशालय के अधिकार पर कानूनी बहस

सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या Enforcement Directorate (ED) हाई कोर्ट में रिट याचिकाएं दायर कर सकता है। यह मुद्दा केरल हाई कोर्ट के एक फैसले से उत्पन्न हुआ जिसने ऐसा करने के ED के अधिकार को बरकरार रखा था। केरल सरकार का तर्क है कि ED केवल केंद्र सरकार का एक विभाग है, न कि एक 'विधिक व्यक्ति' (juridical person) जिसके पास रिट याचिका बनाए रखने के लिए स्वतंत्र कानूनी अधिकार हों। इसके विपरीत, ED का कहना है कि उसके पास PMLA के तहत वैधानिक शक्तियां हैं। यह मामला केंद्रीय एजेंसियों और राज्य अधिकारियों के बीच शक्ति के संतुलन से संबंधित है, विशेष रूप से राज्य स्तर के अधिकारियों की जांच के संबंध में।

मुख्य बिंदु

  • मुख्य मुद्दा यह है कि क्या एक सरकारी विभाग के रूप में ED के पास Article 226 के तहत रिट याचिका दायर करने का 'locus standi' है।
  • Article 32 नागरिकों को मौलिक अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति देता है, जबकि Article 226 हाई कोर्ट को व्यापक शक्तियां देता है।
  • केरल सरकार का तर्क है कि राज्य सरकारों के मुकाबले ED के पास स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं हैं।
  • संविधान के Article 361 के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल के खिलाफ परमादेश (mandamus) की रिट जारी नहीं की जा सकती।

परीक्षा तथ्य

  • Article 32 (सुप्रीम कोर्ट रिट क्षेत्राधिकार) और Article 226 (हाई कोर्ट रिट क्षेत्राधिकार)।
  • Article 361 (राष्ट्रपति/राज्यपाल के लिए उन्मुक्ति)।
  • Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA)।

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