Cybercrime के खिलाफ UN Convention और वैश्विक शासन की चुनौतियां
United Nations ने हाल ही में 'Convention against Cybercrime' को अपनाया है, जो दो दशकों में साइबर स्पेस के लिए पहला बहुपक्षीय आपराधिक न्याय उपकरण है। हालांकि 72 देशों ने इसका समर्थन किया, लेकिन भारत, अमेरिका, जापान और कनाडा जैसे प्रमुख देशों ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए। भारत की अनिच्छा अपने नागरिकों के डेटा पर संस्थागत नियंत्रण की कमी और पहले के जलवायु-शैली के सम्मेलनों में हुए लाभों के क्षरण की चिंताओं से उपजी है। यह कन्वेंशन अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों और जमीनी वास्तविकताओं के बीच की खाई को उजागर करता है, आलोचकों को डर है कि इसकी व्यापक परिभाषाओं का उपयोग पत्रकारों या राजनीतिक विरोधियों पर मुकदमा चलाने के लिए किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु
- Cybercrime पर 2001 Budapest Convention को कई विकासशील देशों द्वारा गैर-समावेशी माना गया था, जिससे नई UN पहल हुई।
- भारत डेटा पर अधिक संप्रभुता चाहता है और इस बात से निराश था कि संस्थागत नियंत्रण के उसके प्रस्तावों को बरकरार नहीं रखा गया।
- अमेरिका और EU चिंतित हैं कि कन्वेंशन का व्यापक दायरा मानवाधिकारों का उल्लंघन कर सकता है और इसमें प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की कमी है।
- वैश्विक शासन एक संकट का सामना कर रहा है क्योंकि बहुपक्षवाद (multilateralism) उच्च-स्तरीय सिद्धांतों तक सीमित हो गया है जबकि संचालन छोटे बहुपक्षीय (plurilateral) समूहों पर आधारित है।
परीक्षा तथ्य
- General Assembly द्वारा December 2024 में UN Convention against Cybercrime अपनाया गया।
- कन्वेंशन को 72 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ।
- Cybercrime पर 2001 Budapest Convention एक पिछला यूरोपीय नेतृत्व वाला प्रयास है।
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