भारतीय शिक्षा का कायाकल्प: छोटे स्कूलों को बड़े, संसाधन-संपन्न Composite Schools में समेकित करने का मामला
भारत का स्कूल नेटवर्क खंडित बना हुआ है, जिसमें कई छोटे स्कूलों में पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है। चीन के बड़े पैमाने के स्कूल डिजाइन से सबक लेते हुए, विशेषज्ञ छोटी इकाइयों को 'composite schools' (कक्षा 1-12) में समेकित करने का सुझाव देते हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने पहले ही यह बदलाव शुरू कर दिया है। बड़े स्कूल विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों, बेहतर बुनियादी ढांचे (ICT लैब, पुस्तकालय) और शैक्षिक स्तरों के बीच छात्रों के सुचारू संक्रमण की अनुमति देते हैं। 2035 तक, भारत को उच्च गुणवत्ता वाली, सार्वभौमिक शिक्षा और छात्रों के लिए बेहतर भविष्य के परिणाम सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक Gram Panchayat में एकीकृत स्कूल मॉडल बनाने के लिए राज्य-विशिष्ट रोडमैप की आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु
- खंडित स्कूल नेटवर्क (50 से कम छात्रों वाले 5.6 लाख स्कूल) भारत में शिक्षा की गुणवत्ता में बाधा डालते हैं।
- Composite schools (कक्षा 1-12) विशेषज्ञ शिक्षकों और व्यावसायिक प्रशिक्षण तक बेहतर पहुंच प्रदान करते हैं।
- मध्य प्रदेश ने NITI Aayog के SATH-E कार्यक्रम के तहत कम नामांकन वाले 36,000 स्कूलों को समेकित किया है।
- Samagra Shiksha योजना इन स्कूल बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए एक महत्वपूर्ण वित्त पोषण स्रोत है।
परीक्षा तथ्य
- 50 से कम छात्रों वाले 5.6 लाख स्कूल
- NITI Aayog का SATH-E कार्यक्रम
- Samagra Shiksha योजना
- सार्वभौमिक उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए लक्ष्य वर्ष 2035
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