Supreme Court ने तर्कहीन मुफ्त उपहारों (Freebies) और आवश्यक जन कल्याण निवेशों के बीच अंतर स्पष्ट किया

Supreme Court ने राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 'तर्कहीन मुफ्त उपहारों' और हाशिए के वर्गों के लिए लक्षित वैध 'कल्याणकारी योजनाओं' के बीच एक स्पष्ट अंतर खींचा है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि हालांकि व्यक्तियों को राज्य की उदारता (largesse) समस्याग्रस्त हो सकती है, लेकिन स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश करना Directive Principles of State Policy (DPSP) के तहत एक संवैधानिक दायित्व है। पीठ ने विकासात्मक उद्देश्यों के लिए समर्पित राजस्व अधिशेष की कमी और बढ़ते राष्ट्रीय ऋण पर चिंता व्यक्त की। यह इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या ऐसे मुफ्त उपहार Representation of the People Act के तहत 'भ्रष्ट आचरण' (corrupt practice) के दायरे में आते हैं।

मुख्य बिंदु

  • न्यायालय ने जोर दिया कि कल्याणकारी योजनाएं शुरू करना Directive Principles of State Policy के तहत एक दायित्व है।
  • इस पर कानूनी बहस चल रही है कि क्या मुफ्त उपहारों को Article 282 के तहत 'संघ या राज्य द्वारा देय व्यय' के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।
  • न्यायालय चुनाव घोषणापत्र के वादों के संबंध में S. Subramaniam Balaji मामले में अपने 2013 के फैसले से हट रहा है।
  • राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य और मुफ्त उपहारों द्वारा गरीबों के बीच 'परजीवी अस्तित्व' पैदा करने की क्षमता के बारे में चिंताएं जताई गईं।

परीक्षा तथ्य

  • Article 282 of the Constitution (संघ या राज्य द्वारा देय व्यय)
  • Section 123 of the Representation of the People Act, 1951 (भ्रष्ट आचरण)
  • S. Subramaniam Balaji versus Tamil Nadu (2013) case

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