निजी संस्थानों में आरक्षण के लिए Article 15(5) के पूर्ण कार्यान्वयन की मांग
कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार से संविधान के Article 15(5) को पूरी तरह से लागू करने का आग्रह किया है, जो राज्य को निजी शैक्षणिक संस्थानों में SC, ST और OBC के लिए आरक्षण प्रदान करने का अधिकार देता है। यह मांग 93वें संवैधानिक संशोधन की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर की गई है। जबकि संशोधन ने केंद्र द्वारा वित्तपोषित उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) में OBC के लिए 27% आरक्षण को सक्षम किया, पार्टी का तर्क है कि निजी संस्थानों में इसका अनुप्रयोग अधूरा है। सुप्रीम कोर्ट ने Pramati Educational and Cultural Trust vs Union of India फैसले (2014) में इस प्रावधान की वैधता को बरकरार रखा था।
मुख्य बिंदु
- सार्वजनिक और निजी दोनों शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण सक्षम करने के लिए 93वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से Article 15(5) जोड़ा गया था।
- यह प्रावधान Article 30(1) में संदर्भित अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को बाहर करता है।
- कांग्रेस का सुझाव है कि उच्च शिक्षा के लिए किसी भी नए नियामक को इन आरक्षणों के कार्यान्वयन की निगरानी करनी चाहिए।
- 2014 का Pramati Trust फैसला Article 15(5) की संवैधानिकता की पुष्टि करने वाला एक ऐतिहासिक फैसला है।
- केंद्र द्वारा वित्तपोषित HEIs में OBC के लिए 27% आरक्षण ने कथित तौर पर लाखों लोगों को आर्थिक और सामाजिक गतिशीलता प्रदान की है।
परीक्षा तथ्य
- 93वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम (2005) ने Article 15(5) पेश किया था।
- Pramati Educational and Cultural Trust vs Union of India का फैसला 6 मई, 2014 को सुनाया गया था।
- Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025, उच्च शिक्षा के लिए एक एकल नियामक स्थापित करने का प्रयास करता है।
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