एक खंडित दुनिया में राह बनाना: छोटे गठबंधनों और 'Diplomatic White Spaces' का उदय

पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन का तर्क है कि वैश्विक शासन UN और G-20 जैसे बड़े, स्थिर मंचों से छोटे, अधिक कार्यात्मक गठबंधनों की ओर बढ़ रहा है। चूंकि UN कमजोर बना हुआ है और G-20 घरेलू राजनीतिक दबावों का सामना कर रहा है, भारत के लिए सबसे अच्छे अवसर 'Diplomatic White Spaces' में निहित हैं—वैश्विक नेतृत्व में वे अंतराल जहां कोई भी एकल शक्ति कमान नहीं संभाल सकती। भारत को वैश्विक सार्वजनिक वस्तुएं प्रदान करने के लिए Quad जैसे गठबंधनों और EU के साथ साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। लेख इस बात पर जोर देता है कि 2026 में सफलता इन 'Small Tables' को केवल औपचारिकता के बजाय व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से कार्यशील बनाने पर निर्भर करेगी।

मुख्य बिंदु

  • European Union (EU) भारत के 2026 गणतंत्र दिवस पर 27-सदस्यीय ब्लॉक के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहा है, जो संस्थागत नेतृत्व की ओर बदलाव का संकेत है।
  • BRICS विस्तार ने इसकी पहुंच को व्यापक बनाया है लेकिन इसके फोकस को धुंधला कर दिया है, जिसके लिए भारत को इसे New Development Bank जैसे व्यावहारिक परिणामों की ओर ले जाने की आवश्यकता है।
  • समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) और लचीले बंदरगाहों पर Quad का ध्यान कार्यात्मक कूटनीति का एक मॉडल है जो महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता से बचता है।
  • 2026 में भारत की गति राजनयिक अंतरालों को मानकों, कार्यक्षमता और सार्वजनिक वस्तुओं पर कार्य व्यवस्था में बदलने से आएगी।

परीक्षा तथ्य

  • EU 2026 में भारत की गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि है।
  • अमेरिका ने 2025 में जोहान्सबर्ग G-20 शिखर सम्मेलन का बहिष्कार किया था।
  • श्रीलंका में चक्रवात दितवाह (Cyclone Ditwah) के बाद भारत का Operation Sagar Bandhu चलाया गया।

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