Enforcement Directorate की शक्तियों और न्याय पर 'Media Trials' के प्रभाव का परीक्षण
यह लेख Enforcement Directorate (ED) के कामकाज और हाई-प्रोफाइल मामलों में 'Media Trials' की भूमिका की आलोचना करता है। यह उन उदाहरणों पर प्रकाश डालता है जहां न्यायपालिका ने ED को अपने जनादेश से बाहर जाने और कानूनी सिद्धांतों का उल्लंघन करने के लिए फटकार लगाई है, जैसे विश्वसनीय जानकारी या 'Predicate Offence' के बिना तलाशी लेना। लेख का तर्क है कि Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत ED की व्यापक शक्तियां, जिसमें जमानत प्राप्त करने की कठिनाई भी शामिल है, का उपयोग तेजी से राजनीतिक डराने-धमकाने के उपकरण के रूप में किया जा रहा है। यह जांच अधिकारियों को मनमानी राज्य शक्ति के साधन बनने से रोकने के लिए तत्काल संवैधानिक सुरक्षा उपायों (Guardrails) का आह्वान करता है।
मुख्य बिंदु
- PMLA के लिए एक 'Predicate Offence' (अनुसूचित अपराध) की आवश्यकता होती है जो मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाने से पहले अपराध की आय (Proceeds of Crime) उत्पन्न करता हो।
- PMLA की Section 50 ED को व्यक्तियों को समन करने और शपथ के तहत बयान दर्ज करने की अनुमति देती है, जिसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- PMLA के तहत 'Reverse burden of proof' (सबूत का उल्टा बोझ) आरोपी व्यक्तियों के लिए नियमित आपराधिक कानून की तुलना में जमानत सुरक्षित करना असाधारण रूप से कठिन बना देता है।
- Vijay Madanlal Choudhary बनाम Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने PMLA के कई प्रावधानों को बरकरार रखा, लेकिन फैसला अभी भी समीक्षा के अधीन है।
परीक्षा तथ्य
- Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002।
- प्रमुख PMLA धाराएं: Section 17 (तलाशी), Section 19 (गिरफ्तारी की शक्तियां), और Section 50 (समन)।
- Vijay Madanlal Choudhary बनाम Union of India मामला।
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