UPSC ने परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करने और प्रतिरूपण (Impersonation) को रोकने के लिए उम्मीदवारों के लिए फेस ऑथेंटिकेशन (Face Authentication) अनिवार्य किया
Union Public Service Commission (UPSC) ने घोषणा की है कि उसकी परीक्षाओं में बैठने वाले सभी उम्मीदवारों को केंद्रों पर फेस ऑथेंटिकेशन से गुजरना होगा। गुरुग्राम और गुजरात में एक सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता को मजबूत करना और धोखाधड़ी, नकल और प्रतिरूपण को रोकना है। AI-सक्षम तकनीक प्रति उम्मीदवार सत्यापन समय को औसतन 8-10 सेकंड तक कम कर देती है। यह कदम Puja Khedkar मामले के बाद उठाया गया है, जहां एक परिवीक्षाधीन (probationer) ने कथित तौर पर निर्धारित सीमा से अधिक प्रयास प्राप्त करने के लिए जाली पहचान और विकलांगता प्रमाण पत्रों का उपयोग किया था, जिससे सख्त सत्यापन प्रोटोकॉल की आवश्यकता महसूस हुई।
मुख्य बिंदु
- नई प्रणाली पंजीकरण के दौरान जमा की गई तस्वीरों के साथ उम्मीदवारों का मिलान करने के लिए AI-सक्षम फेशियल रिकग्निशन (facial recognition) का उपयोग करती है।
- प्रवेश प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए National e-Governance Division (NeGD) की सहायता से यह पहल विकसित की गई थी।
- सत्यापन का समय प्रति उम्मीदवार औसतन 8 से 10 सेकंड तक काफी कम हो गया है, जिससे सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ गई है।
- यह कदम Civil Services Examination (CSE) में जाली पहचान और विकलांगता प्रमाण पत्रों से संबंधित विवादों के बाद उठाया गया है।
परीक्षा तथ्य
- National e-Governance Division (NeGD) ने इस परियोजना में सहायता की।
- UPSC सालाना 3,000 केंद्रों पर 14 प्रमुख परीक्षाएं और कई भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है।
- AI-सक्षम फेशियल ऑथेंटिकेशन के लिए पायलट प्रोजेक्ट गुरुग्राम और गुजरात में चलाया गया था।
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