EC ने मतदाता सूची से विदेशियों को बाहर करने के संवैधानिक कर्तव्य पर जोर दिया और Special Intensive Revision का बचाव किया
Election Commission of India (EC) ने Supreme Court के समक्ष मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) का बचाव किया और इसे 'समानांतर NRC' बताने वाले दावों को खारिज कर दिया। EC ने तर्क दिया कि Article 324 के तहत यह उसका संवैधानिक कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि सूची में केवल नागरिक ही शामिल हों। इसने स्पष्ट किया कि जहां NRC में सभी निवासी शामिल होते हैं, वहीं मतदाता सूची में केवल 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिक शामिल होते हैं। EC ने यह भी नोट किया कि Citizenship Act, 1955 की Section 9(2) के तहत नागरिकता की समाप्ति पर केंद्र सरकार का विशेष अधिकार क्षेत्र है, जबकि EC मतदाता पात्रता का प्रबंधन करता है।
मुख्य बिंदु
- EC का मानना है कि मतदाता सूची के लिए नागरिकता का सत्यापन Article 324 के तहत एक अनिवार्य संवैधानिक कर्तव्य है।
- Special Intensive Revision (SIR), National Register of Citizens (NRC) से अलग है क्योंकि इसमें केवल उन कानूनी वयस्कों की गणना की जाती है जो नागरिक हैं।
- Citizenship Act, 1955 की Section 14A केंद्र को NRC बनाए रखने का अधिकार देती है, जबकि EC मतदाता सूची की शुद्धता पर ध्यान केंद्रित करता है।
- EC अपनी भूमिका को Section 9(2) के तहत नागरिकता समाप्ति पर केंद्र सरकार के विशेष अधिकार क्षेत्र से अलग करता है।
परीक्षा तथ्य
- Constitution का Article 324 मतदाता सूची तैयार करने के लिए EC को शक्ति प्रदान करता है।
- Citizenship Act, 1955 की Section 14A भारतीय नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (National Register of Indian Citizens) से संबंधित है।
- हालिया संशोधन के दौरान Uttar Pradesh की मसौदा मतदाता सूची में 2.89 crore मतदाताओं को हटाया गया।
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