Polluter Pays Principle और दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर कानूनी और पर्यावरणीय दृष्टिकोण

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक जटिल मुद्दा है जो मुख्य रूप से वाहनों के उत्सर्जन और मौसमी पराली जलाने से प्रेरित है। लेख 'Polluter Pays Principle' (PPP) पर चर्चा करता है, जो यह अनिवार्य करता है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वालों को बहाली की लागत वहन करनी चाहिए। हालांकि, भारत में 'government-pays principle' की ओर बदलाव देखा जा रहा है, जहाँ राज्य निगरानी और शमन की लागत वहन करता है। PM2.5 प्रदूषण की सीमा-पार प्रकृति के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है, जैसा कि CLRTAP जैसे सम्मेलनों में देखा गया है। न्यायपालिका एक सक्रिय भूमिका निभाती है, लेकिन नुकसान की मात्रा निर्धारित करने और गैर-बिंदु स्रोतों (non-point sources) पर दायित्व लागू करने में चुनौतियां बनी हुई हैं।

मुख्य बिंदु

  • Supreme Court ने Vellore Citizens Welfare Forum vs Union of India (1996) मामले में Polluter Pays Principle को भारतीय कानून के हिस्से के रूप में मान्यता दी।
  • PM2.5 को एक लंबी दूरी के सीमा-पार वायु प्रदूषक के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासनिक सीमाओं से परे क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
  • European Court of Justice द्वारा Standley निर्णय आनुपातिकता पर जोर देता है, यह सुझाव देते हुए कि किसानों को मौसमी प्रदूषण के लिए पूरी तरह उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है।
  • भारत ने Articles 48A और 51A(g) और Environment Protection Act 1986 के माध्यम से संविधान में पर्यावरण संरक्षण को एकीकृत किया है।

परीक्षा तथ्य

  • National Green Tribunal (NGT) Act 2010 में पारित किया गया था।
  • Convention on Long-Range Trans-boundary Air Pollution (CLRTAP) की स्थापना 1979 में हुई थी।
  • भारतीय संविधान का Article 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने का निर्देश देता है।

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