द राइट टू डिस्कनेक्ट बिल (The Right to Disconnect Bill): भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी और कर्मचारी कल्याण के बीच संतुलन

एक निजी सदस्य विधेयक (private member's bill) के रूप में पेश किया गया 'द राइट टू डिस्कनेक्ट बिल', डिजिटल युग में काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच धुंधली होती रेखाओं को संबोधित करना चाहता है। यह प्रस्तावित करता है कि कर्मचारियों को निर्धारित कार्य घंटों के बाहर काम से संबंधित संचार को अनदेखा करने का अधिकार है। यह विधेयक फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय न्यायालयों से प्रेरणा लेता है। हालांकि, आलोचक डिजिटल अर्थव्यवस्था में 'काम' की परिभाषा और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 जैसे मौजूदा श्रम संहिताओं के साथ इसके एकीकरण के संबंध में अस्पष्टताओं की ओर इशारा करते हैं। यह Article 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) को भी छूता है।

मुख्य बिंदु

  • विधेयक निर्धारित घंटों के बाद कर्मचारियों को कार्य संचार से अलग होने के कानूनी अधिकार का प्रस्ताव करता है।
  • यह व्यक्तिगत स्वायत्तता के संवैधानिक अधिकार और Article 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा है।
  • वर्तमान भारतीय श्रम कानूनों में डिजिटल अर्थव्यवस्था के संदर्भ में 'काम' की स्पष्ट परिभाषा का अभाव है।
  • विधेयक का उद्देश्य 'कार्य-समय के बाद के संचार' को विनियमित करना है, जिसके लिए वर्तमान में भारत में एक विशिष्ट कानूनी ढांचे की कमी है।

परीक्षा तथ्य

  • भारतीय संविधान का Article 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार)।
  • Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020।
  • प्राइवेट मेंबर बिल की स्थिति (शायद ही कभी अधिनियमित होती है लेकिन विधायी चर्चा निर्धारित करती है)।

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