प्रदूषण से निपटने पर चीन से सबक: बीजिंग और दिल्ली की वायु गुणवत्ता रणनीतियों की तुलना

बीजिंग ने सुसंगत नीति, सख्त प्रवर्तन और क्षेत्रीय समन्वय से जुड़ी 'top-down' पद्धति के माध्यम से 2013 और 2021 के बीच PM2.5 के स्तर को 50% से अधिक सफलतापूर्वक कम किया। इसके विपरीत, भारत के प्रयास, जैसे National Clean Air Programme (NCAP), अक्सर प्रतिक्रियाशील होते हैं और कई एजेंसियों में खंडित होते हैं। चीन की 'airshed' रणनीति ने बीजिंग-तियानजिन-हेबेई क्षेत्र के लिए सीमा पार विनियमन सुनिश्चित किया। भारत छिटपुट प्रतिक्रियाओं से दीर्घकालिक मिशन-उन्मुख रणनीति की ओर बढ़कर, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में तेजी लाकर और Air Act, 1981 और Environment Protection Act, 1986 जैसे मौजूदा कानूनों के कार्यान्वयन को मजबूत करके सीख सकता है।

मुख्य बिंदु

  • समन्वित क्षेत्रीय कार्रवाई के कारण बीजिंग का PM2.5 स्तर 2013 में 102 µg/m³ से गिरकर 2024 में 31 µg/m³ हो गया।
  • चीन ने क्षेत्रीय समन्वय के लिए 'airshed' रणनीति का उपयोग किया, जिसकी वर्तमान में भारत में दिल्ली-NCR क्षेत्र के लिए कमी है।
  • भारत का नियामक ढांचा खंडित है, जिसमें हस्तक्षेप अक्सर दीर्घकालिक योजना के बजाय 'प्रदूषण के चरम' (pollution peaks) तक सीमित होते हैं।
  • प्रमुख भारतीय कानूनों में Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981 और Environment Protection Act, 1986 शामिल हैं।

परीक्षा तथ्य

  • बीजिंग ने 2013 और 2021 के बीच PM2.5 के स्तर को 50% से अधिक कम किया।
  • दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए Commission for Air Quality Management (CAQM) की स्थापना की गई थी।
  • Air (Prevention and Control of Pollution) Act को 1981 में अधिनियमित किया गया था।

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