प्रस्तावित MGNREGA संशोधनों ने संवैधानिक Directive Principles और ग्रामीण श्रम अधिकारों पर बहस छेड़ दी

केंद्र सरकार का प्रस्तावित 'Viksit Bharat-G RAM G Bill 2025' Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA) में आमूलचूल परिवर्तन करना चाहता है। आलोचकों का तर्क है कि यह विधेयक संविधान के Article 41 को कमजोर करता है, जो राज्य को काम का अधिकार सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। मुख्य चिंताओं में मांग-आधारित मॉडल से 'मानक वित्तीय आवंटन' (normative financial allocations) की ओर बदलाव, बढ़ता केंद्रीकरण और कृषि के पीक सीजन के दौरान काम पर रोक शामिल है। विरोधियों का दावा है कि इन बदलावों से ग्रामीण श्रमिकों की सौदेबाजी की शक्ति कम हो जाएगी और महिलाओं तथा हाशिए के समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

मुख्य बिंदु

  • प्रस्तावित विधेयक MGNREGA को मांग-आधारित मॉडल से हटाकर निश्चित केंद्रीय आवंटन पर आधारित मॉडल में बदल देता है।
  • Directive Principles of State Policy (DPSP) का Article 41 काम का अधिकार प्रदान करने के राज्य के कर्तव्य पर जोर देता है।
  • विधेयक कृषि के पीक सीजन के दौरान MGNREGA कार्य को प्रतिबंधित करता है, जिसके बारे में आलोचकों का कहना है कि यह मजदूरों के बजाय बड़े जमींदारों के पक्ष में है।
  • अनिवार्य आधार-लिंक्ड भुगतान और डिजिटल उपस्थिति की आलोचना खराब कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में श्रमिकों को पीड़ित करने के लिए की जा रही है।

परीक्षा तथ्य

  • संविधान का Article 41 'कुछ मामलों में काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता के अधिकार' से संबंधित है।
  • MGNREGA कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 50% से अधिक है।
  • नए विधेयक का शीर्षक 'Viksit Bharat-G RAM G Bill 2025' है।

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