भारत में नागरिकता और मतदाता सूची निर्धारण की कानूनी और संवैधानिक चुनौतियां

यह लेख Election Commission of India (ECI) के मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और नागरिकता पर Ministry of Home Affairs (MHA) के अधिकार के बीच संघर्ष की पड़ताल करता है। जहाँ ECI का तर्क है कि उसे नामांकन के लिए पात्रता सत्यापित करनी चाहिए, वहीं आलोचकों का सुझाव है कि केवल MHA के पास नागरिकता निर्धारित करने की कानूनी शक्ति है। यह चर्चा Citizenship Act of 1955, National Register of Citizens (NRC) और National Population Register (NPR) पर आधारित है। यह व्यक्तियों पर नागरिकता साबित करने के प्रशासनिक बोझ पर प्रकाश डालता है, विशेष रूप से असम में, जहाँ NRC प्रक्रिया ने कई लोगों को 'संदिग्ध नागरिकता' की स्थिति में छोड़ दिया है।

मुख्य बिंदु

  • ECI के Special Intensive Revision (SIR) को नागरिकता निर्धारण के क्षेत्र में संभावित अतिक्रमण के लिए कानूनी रूप से चुनौती दी जा रही है।
  • Citizenship Act of 1955 के तहत, नागरिकता निर्धारित करने की शक्ति मुख्य रूप से केंद्रीय Ministry of Home Affairs के पास है।
  • National Population Register (NPR) को आखिरी बार 2015 में 119 करोड़ निवासियों के विवरण के साथ अपडेट किया गया था।
  • असम एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ ड्राफ्ट NRC है, जिसके परिणामस्वरूप 19 लाख निवासियों को बाहर कर दिया गया है।

परीक्षा तथ्य

  • Citizenship Act of 1955।
  • Citizenship Act की Section 6A (असम समझौते के माध्यम से शामिल)।
  • असम NRC से 19 लाख निवासी बाहर।

पढ़ें। याद रखें। याद करें।

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