Supreme Court ऐतिहासिक असम समझौते के उल्लंघन के लिए चुनौती दिए गए 2025 के आदेश की समीक्षा करेगा
Supreme Court ने Immigration and Foreigners (Exemption) Order 2025 को चुनौती देने वाली याचिका के संबंध में केंद्र से जवाब मांगा है। Asom Gana Parishad (AGP) का तर्क है कि यह आदेश अवैध प्रवासियों के लिए कट-ऑफ तारीख को 24 मार्च, 1971 से बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2024 करके असम समझौते (Assam Accord) का खंडन करता है। याचिका में दावा किया गया है कि यह Citizenship Act, 1955 की Section 6A का उल्लंघन करता है, जिसे विशेष रूप से असमिया लोगों की जनसांख्यिकी और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के समझौते के इरादे को बनाए रखने के लिए डाला गया था। न्यायालय की समीक्षा इन छूटों की संवैधानिकता पर केंद्रित होगी।
मुख्य बिंदु
- असम समझौते ने असम में विदेशियों की पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने के लिए 24 मार्च, 1971 को कट-ऑफ तारीख के रूप में स्थापित किया था।
- 2025 के आदेश पर कुछ अल्पसंख्यकों को 2024 के अंत तक रहने की अनुमति देकर अवैध अप्रवासन को 'अप्रत्यक्ष रूप से वैध' बनाने का आरोप है।
- Citizenship Act, 1955 की Section 6A असम समझौते की कानूनी रीढ़ है और इसे हाल ही में एक संविधान पीठ ने बरकरार रखा था।
- AGP का तर्क है कि कट-ऑफ तारीख का कोई भी विस्तार असम के लोगों को दिए गए वैधानिक संरक्षण का उल्लंघन है।
परीक्षा तथ्य
- असम समझौते के तहत कट-ऑफ तारीख 24 मार्च, 1971 है।
- असम समझौते को लागू करने के लिए Citizenship Act, 1955 में Section 6A जोड़ी गई थी।
- यह याचिका Asom Gana Parishad (AGP) द्वारा दायर की गई थी।
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