शिशु कुपोषण से होने वाली मौतों पर विशिष्ट आंकड़ों की कमी के लिए केंद्र सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा
केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने हाल ही में जनजातीय क्षेत्रों में कुपोषण के कारण शिशुओं की मृत्यु के संबंध में संसदीय प्रश्नों का उत्तर दिया। हालांकि सरकार ने 1990-91 के बाद से स्टंटिंग (stunting) और वेस्टिंग (wasting) संकेतकों में समग्र सुधार दिखाने के लिए National Family Health Survey (NFHS) के आंकड़ों का हवाला दिया, लेकिन वह पिछले पांच वर्षों में कुपोषण के कारण हुई कुल मौतों पर विशिष्ट संख्या प्रदान करने में विफल रही। जवाब में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि पांच वर्ष से कम उम्र के 13.7 करोड़ बच्चे हैं, लेकिन केवल 6.6 करोड़ ही "Poshan Tracker" पर पंजीकृत हैं। अक्टूबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि जांचे गए 52% बच्चे अभी भी कुपोषण से पीड़ित हैं।
मुख्य बिंदु
- सरकार कुपोषण की निगरानी के लिए NFHS डेटा और 'Poshan Tracker' पर निर्भर है, लेकिन कुपोषण से संबंधित मौतों के लिए उसके पास प्रत्यक्ष डेटाबेस की कमी है।
- कुल बाल जनसंख्या और आंगनवाड़ी केंद्रों/Poshan Tracker में नामांकित बच्चों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है।
- हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि जांचे गए आधे से अधिक (52%) बच्चे स्टंटेड, वेस्टेड या कम वजन के पाए गए।
- मंत्रालय ने कुपोषण के कारण मृत्यु दर और रुग्णता को कम करने के उद्देश्य से मौजूदा प्रोटोकॉल और योजनाओं पर जोर दिया।
परीक्षा तथ्य
- Poshan Tracker पोषण वितरण की निगरानी के लिए सरकार का डिजिटल उपकरण है।
- National Family Health Survey (NFHS) भारत में स्वास्थ्य और पोषण संकेतकों के लिए प्राथमिक डेटा प्रदान करता है।
- अक्टूबर 2025 तक, जांचे गए 52% बच्चों की पहचान कुपोषित के रूप में की गई थी।
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