सुप्रीम कोर्ट ने करुणा के मौलिक कर्तव्य का हवाला देते हुए आवारा कुत्तों के स्थानांतरण का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने नगर निकायों को सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के लिए आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश Article 51A(g) के तहत नागरिकों के जीवित प्राणियों के प्रति करुणा रखने के 'मौलिक कर्तव्य' पर जोर देता है। हालांकि, कार्यान्वयन को बुनियादी ढांचे और पशु अधिकारों तथा मानव सुरक्षा के बीच संतुलन के संबंध में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 की Section 3 का हवाला दिया, जो जानवरों के कल्याण को अनिवार्य बनाती है। Animal Welfare Board of India vs A. Nagaraja जैसे पिछले निर्णयों ने स्थापित किया था कि सभी जीवित प्राणियों में अंतर्निहित गरिमा होती है और उन्हें अनावश्यक पीड़ा से मुक्त, शांति से जीने का अधिकार है।

मुख्य बिंदु

  • संविधान का Article 51A(g) प्रत्येक नागरिक के मौलिक कर्तव्य के रूप में जीवित प्राणियों के प्रति करुणा को अनिवार्य बनाता है।
  • Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 के अनुसार जानवरों के प्रभारी व्यक्तियों को उनका कल्याण सुनिश्चित करना आवश्यक है।
  • अदालत Article 21 के तहत जीवन और सुरक्षा के मानव अधिकार के साथ पशु करुणा को संतुलित करने का प्रयास करती है।
  • नगर पालिकाओं को कानूनी रूप से पशु आश्रयों, नसबंदी और टीकाकरण के लिए बुनियादी ढांचा प्रदान करने का काम सौंपा गया है।

परीक्षा तथ्य

  • Article 51A(g) जीवित प्राणियों के प्रति करुणा को एक मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duty) के रूप में सूचीबद्ध करता है।
  • Prevention of Cruelty to Animals Act वर्ष 1960 में लागू किया गया था।
  • Animal Welfare Board of India vs A. Nagaraja (2014) पशु अधिकारों पर एक ऐतिहासिक निर्णय है।

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