भारत ने वैश्विक शांति प्रार्थना उत्सव के लिए भूटान को पवित्र बुद्ध अवशेष भेजे
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष, जिन्हें Piprahwa relics के रूप में जाना जाता है, भारत से भूटान को 16 दिवसीय Global Peace Prayer Festival (GPPF) के लिए 'सद्भावना उपहार' के रूप में भेजे गए हैं। उत्तर प्रदेश में नेपाल सीमा के पास खोजे गए इन अवशेषों का गहरा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है। उन्हें सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए थिम्पू में ताशिछोडज़ोंग (Tashichhodzong) के ग्रैंड कुएनरे में स्थापित किया जाएगा। यह कदम भारत और भूटान के बीच गहरे आध्यात्मिक सहयोग को रेखांकित करता है, जो भूटान के चौथे राजा की 70वीं जयंती के साथ मेल खाता है। यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में 'बौद्ध कूटनीति' (Buddhist diplomacy) को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु
- Piprahwa relics का नाम उत्तर प्रदेश के उस स्थल के नाम पर रखा गया है जहाँ वे नेपाल सीमा के पास खोजे गए थे।
- इन अवशेषों को थिम्पू, भूटान में Global Peace Prayer Festival (GPPF) के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है।
- यह पहल आध्यात्मिक सहयोग को दर्शाती है जो दोनों देशों के बीच राजनीतिक और विकासात्मक सहयोग का पूरक है।
- यह स्थापना भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक की 70वीं जयंती के उपलक्ष्य में है।
परीक्षा तथ्य
- इन अवशेषों का नाम उत्तर प्रदेश के एक स्थल पिपरहवा (Piprahwa) के नाम पर रखा गया है।
- Tashichhodzong थिम्पू, भूटान में एक प्रमुख किला और मठ है।
- Global Peace Prayer Festival (GPPF) 16 दिनों तक चलता है।
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