मंत्री पद के कार्यकाल और हिरासत के संबंध में 130वें Constitution Amendment Bill से जुड़े विवादास्पद मुद्दे
केंद्र सरकार ने Articles 75, 164 और 239AA में संशोधन के लिए Constitution (One Hundred and Thirtieth Amendment) Bill पेश किया। यह प्रस्ताव करता है कि पांच साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने वाले किसी भी मंत्री को पद से हटा दिया जाना चाहिए। आलोचकों का तर्क है कि यह प्रवर्तन एजेंसियों को अत्यधिक विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है, जिससे संभावित रूप से "गिरफ्तारी" की प्रक्रिया का उपयोग विपक्षी नेताओं के खिलाफ एक राजनीतिक उपकरण के रूप में किया जा सकता है। यह विधेयक Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) के साथ भी जुड़ता है और "जमानत नियम है, जेल अपवाद है" के सिद्धांत और स्वतंत्रता के अधिकार पर चिंता पैदा करता है।
मुख्य बिंदु
- विधेयक विशिष्ट अपराधों के लिए लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर मंत्री को हटाने का आदेश देता है।
- यह केंद्रीय मंत्रिपरिषद, राज्य मंत्रिपरिषद और दिल्ली के लिए विशेष प्रशासनिक प्रावधानों को प्रभावित करता है।
- कानूनी विशेषज्ञों को चिंता है कि विधेयक CrPC/BNSS की Section 167(2) के तहत 'डिफ़ॉल्ट बेल' को ध्यान में नहीं रखता है।
- यह विधेयक संभावित रूप से निर्दोषता के अनुमान और Article 21 के तहत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार को कमजोर कर सकता है।
परीक्षा तथ्य
- यह विधेयक Articles 75 (केंद्रीय मंत्री), 164 (राज्य मंत्री) और 239AA (दिल्ली) में संशोधन करना चाहता है।
- हटाने के लिए सीमा 5+ साल के कारावास से दंडनीय अपराधों के लिए हिरासत में लगातार 30 दिन है।
- Satender Kumar Antil vs CBI (2022) के सुप्रीम कोर्ट मामले में CrPC की Section 41 के तहत गिरफ्तारी के दिशा-निर्देशों पर जोर दिया गया था।
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