सुप्रीम कोर्ट ने CBI को धोखाधड़ी वाले 'Digital Arrests' के खतरे की जांच का काम सौंपा
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने Central Bureau of Investigation (CBI) को 'digital arrests' के बढ़ते मामलों की जांच करने का निर्देश दिया है। जालसाज, जो अक्सर सीमाओं के पार 'scam compounds' से काम करते हैं, निर्दोष नागरिकों, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों से पैसे वसूलने के लिए कानून प्रवर्तन या न्यायिक अधिकारियों के रूप में पेश आते हैं। वे नकली अदालत कक्ष और पुलिस स्टेशन का वातावरण बनाने के लिए AI सहित उन्नत तकनीक का उपयोग करते हैं। अदालत ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया जब लोगों को बड़ी रकम न देने पर गिरफ्तारी की धमकी दिए जाने की खबरें आईं।
मुख्य बिंदु
- 'Digital arrest' एक साइबर अपराध है जहां पीड़ितों को कानूनी जांच के बहाने ऑनलाइन रहने के लिए डराया जाता है।
- अपराधी AI और deepfake तकनीक का उपयोग पृष्ठभूमि को यथार्थवादी पुलिस स्टेशनों या अदालत कक्षों में बदलने के लिए करते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इनमें से कई साइबर अपराध भारत के बाहर संगठित 'scam compounds' से उत्पन्न होते हैं।
- CBI से इस तरह के साइबर अपराध के मामलों की भारी मात्रा को संभालने के लिए अपने संसाधनों का आकलन करने को कहा गया है।
परीक्षा तथ्य
- पीठ: Justices Surya Kant और Joymalya Bagchi.
- Attorney-General: R. Venkataramani.
- Solicitor-General: Tushar Mehta.
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