भारतीय नगर पालिकाओं के राजकोषीय ढांचे में खामियां
भारतीय शहर राष्ट्रीय GDP का लगभग दो-तिहाई हिस्सा उत्पन्न करते हैं लेकिन देश के कर राजस्व के 1% से भी कम को नियंत्रित करते हैं। GST की शुरुआत से चुंगी (octroi) जैसे स्थानीय करों का नुकसान हुआ, जिससे नगर पालिकाएं अंतर-सरकारी हस्तांतरण पर निर्भर हो गईं। लेख 'राजकोषीय लोकतंत्र' (fiscal democracy) का तर्क देता है, जहां शहरों को स्कैंडिनेवियाई मॉडलों के समान सीधे कर लगाने का अधिकार हो। यह सुझाव देता है कि म्यूनिसिपल बॉन्ड और GST मुआवजे का एक हिस्सा सहकारी संघवाद को बहाल कर सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि शहरों को केवल लागत केंद्रों के बजाय राष्ट्रीय समृद्धि की नींव के रूप में देखा जाए।
मुख्य बिंदु
- नगर पालिकाओं में राजकोषीय स्वायत्तता और अनुमानित राजस्व धाराओं की कमी है, जिससे 'लोकतंत्र का अजीबोगरीब उलटफेर' होता है।
- कराधान के अत्यधिक केंद्रीकरण ने स्थानीय शासन और सेवा वितरण को कमजोर कर दिया है।
- सुधारों में शहरों को म्यूनिसिपल उधार के लिए GST मुआवजे के एक हिस्से को निर्धारित करने के लिए सशक्त बनाना शामिल होना चाहिए।
परीक्षा तथ्य
- संवैधानिक संदर्भ: शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित 74th Amendment Act।
- राजस्व हानि: GST द्वारा चुंगी जैसे स्थानीय करों को शामिल करने के बाद शहरों ने अपने स्वयं के राजस्व स्रोतों का लगभग 19% खो दिया।
पढ़ें। याद रखें। याद करें।
स्पेस्ड-रिपीटिशन फ्लैशकार्ड, दैनिक क्विज़ और ऑफ़लाइन एक्सेस पाएं — एंड्रॉइड पर मुफ़्त।