अत्यधिक मानसून घटनाओं के प्रबंधन के लिए भारत को बेहतर पूर्वानुमान और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है
भारत में इस साल सामान्य से 8% अधिक मानसून बारिश हुई, जिससे भरपूर Kharif फसलें हुईं लेकिन महत्वपूर्ण आपदाएं भी आईं। अगस्त और सितंबर में मूसलाधार बारिश ने Himachal Pradesh, Punjab और Jammu and Kashmir के जिलों को जलमग्न कर दिया। संपादकीय का तर्क है कि हालांकि पूर्वानुमान में सुधार हुआ है, लेकिन इन घटनाओं के 'framing' को बदलने की जरूरत है। 'Cloudburst' जैसे शब्दों का इस्तेमाल अक्सर अधिकारियों द्वारा भारी बारिश का वर्णन करने के लिए किया जाता है, जो संभावित रूप से आपदा तैयारियों में विफलताओं को छिपा सकता है। India Meteorological Department (IMD) ने 'सामान्य से अधिक' वर्षा की भविष्यवाणी की थी, फिर भी बुनियादी ढांचा बाढ़, भूस्खलन और गाद से निपटने के लिए अपर्याप्त है।
मुख्य बिंदु
- भारत की मानसून वर्षा इस वर्ष 87 cm के Long-period average (LPA) से 8% अधिक थी।
- बेहतर पूर्वानुमान को बेहतर आपदा तैयारी और लचीले बुनियादी ढांचे के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
- मौसम संबंधी शब्दों जैसे 'cloudburst' का दुरुपयोग शासन की विफलताओं से दोष हटाकर 'प्राकृतिक' आपदाओं पर डाल सकता है।
- भरपूर बारिश के बावजूद देश भर में भूमि क्षरण और गाद जमा होने से भारी नुकसान हुआ है।
परीक्षा तथ्य
- सामान्य से 8% अधिक मानसून बारिश
- 87 cm का Long-period average (LPA)
- जलाशयों में 163 BCM कुल उपलब्ध जल क्षमता
- IMD (India Meteorological Department)
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