लड़कियों की शिक्षा और सामाजिक संकेतकों पर Beti Bachao Beti Padhao का प्रभाव
पिछले दशक में, Beti Bachao, Beti Padhao (BBBP) जैसी पहलों के कारण भारत ने लड़कियों की शिक्षा में बदलाव देखा है। 2015 में शुरू की गई BBBP का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना और शिक्षा को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम की सफलता जन्म के समय बेहतर लिंगानुपात और उच्च महिला साक्षरता दर में दिखाई देती है। गुजरात में, Kanya Kelavani अभियान (2003) ने एक अग्रदूत के रूप में कार्य किया, जिसने स्कूलों में शौचालयों की कमी जैसी बाधाओं को दूर किया। इन प्रयासों ने एक सकारात्मक चक्र को जन्म दिया है जहाँ शिक्षित महिलाएं देर से शादी करती हैं, उनके कम बच्चे होते हैं, और उनके संस्थागत स्वास्थ्य सेवा लेने और कार्यबल में शामिल होने की अधिक संभावना होती है।
मुख्य बिंदु
- BBBP समन्वित परिवर्तन के लिए महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों को शामिल करने वाला एक बहु-मंत्रालयी प्रयास है।
- बेहतर महिला साक्षरता का सीधा संबंध कम प्रजनन दर और बेहतर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों से है।
- इस पहल ने सामाजिक मानसिकता को बदल दिया है, जिससे जल्दी शादी को रोकने और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समर्थन बढ़ा है।
- शिक्षित महिलाओं के कार्यबल में शामिल होने और अपने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश करने की अधिक संभावना होती है।
परीक्षा तथ्य
- Beti Bachao, Beti Padhao (BBBP) पहल 2015 में देश भर में शुरू की गई थी।
- भारत का जन्म के समय लिंगानुपात 919 (2015-16) से सुधरकर 929 (2019-21) हो गया।
- भारत की Total Fertility Rate (TFR) गिरकर 2.0 हो गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर (replacement level) से नीचे है।
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