एक संप्रभु राज्य के रूप में Palestine की अंतरराष्ट्रीय मान्यता का महत्व
यह लेख अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हालिया बदलाव का विश्लेषण करता है जहां U.K., France, Canada और Australia ने UN General Assembly में Palestine को मान्यता दी। ऐतिहासिक रूप से, पश्चिमी देशों ने जोर दिया था कि मान्यता केवल बातचीत के जरिए द्वि-राज्य समाधान (two-state settlement) के बाद ही मिलनी चाहिए। यह बदलाव वर्तमान राजनयिक प्रक्रिया में कम होते विश्वास और 1948 के बाद के इजरायल समर्थक आम सहमति से अलगाव का संकेत देता है। हालांकि मान्यता एक राजनयिक राहत प्रदान करती है, लेकिन यह Gaza में विनाशकारी संघर्ष और West Bank में बस्तियों के विस्तार के बीच आई है। लेख सुझाव देता है कि यदि इजरायल विलय जारी रखता है, तो यूरोपीय देशों को हथियारों के प्रतिबंध (arms embargos) पर विचार करना चाहिए, और मान्यता को भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य के लिए एक आधार के रूप में देखना चाहिए।
मुख्य बिंदु
- प्रमुख पश्चिमी शक्तियों द्वारा हालिया मान्यता पिछली 'पहले बातचीत' वाली राजनयिक नीतियों से एक महत्वपूर्ण विचलन का प्रतीक है।
- यह कदम द्वि-राज्य समाधान की दिशा में प्रगति की कमी और Gaza में मानवीय संकट के साथ बढ़ती अंतरराष्ट्रीय हताशा को दर्शाता है।
- मान्यता को वर्तमान जमीनी हकीकत और बस्तियों के विस्तार के बावजूद एक संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की संभावना को बनाए रखने के तरीके के रूप में देखा जाता है।
- इजरायल की स्थापना और उसके बाद के संघर्षों में अपनी भूमिकाओं के कारण U.K. और France इस क्षेत्र के मुद्दों के लिए ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाते हैं।
परीक्षा तथ्य
- Palestine Liberation Organisation (PLO) ने 1988 में Palestine राज्य की घोषणा की थी।
- United States ने 1948 की घोषणा के तुरंत बाद 1949 में यहूदी राष्ट्र (इजरायल) को मान्यता दी थी।
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