Supreme Court ने पराली जलाने (Stubble Burning) के लिए आपराधिक अभियोजन का प्रस्ताव दिया; केंद्र ने नीति और व्यवहार्यता संबंधी चिंताओं का हवाला दिया

CJI B.R. Gavai के नेतृत्व वाली Supreme Court की एक बेंच ने उत्तर भारत में सर्दियों के वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पराली जलाने (stubble burning) में शामिल किसानों के लिए आपराधिक अभियोजन (criminal prosecution) को फिर से शुरू करने का सुझाव दिया। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि हालांकि किसान महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उन्हें पर्यावरण की रक्षा भी करनी चाहिए, और 'carrot and stick' दृष्टिकोण की वकालत की। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वर्तमान नीति दंडात्मक जेल की सजा के बजाय सहकारी उपायों पर केंद्रित है। केंद्र ने उल्लेख किया कि कृषि समुदाय को अपराधी बनाने से बचने के लिए नीतिगत मामले के रूप में वर्तमान में किसानों को Commission for Air Quality Management Act के तहत अभियोजन से छूट दी गई है।

मुख्य बिंदु

  • CJI ने पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ कड़ा संदेश देने के लिए आपराधिक अभियोजन की वकालत की।
  • केंद्र ने तर्क दिया कि उसकी नीति किसानों को जेल भेजने के बजाय उन्हें साथ लेकर चलने की है।
  • वर्तमान में किसानों को Commission for Air Quality Management Act के तहत अभियोजन से छूट प्राप्त है।
  • कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि राज्यों में एक समान नीति विकसित नहीं की गई तो वह 'mandamus' जारी कर सकता है।

परीक्षा तथ्य

  • CJI B.R. Gavai ने बेंच की अध्यक्षता की।
  • Commission for Air Quality Management Act किसानों के लिए वर्तमान छूट को नियंत्रित करता है।
  • पराली जलाने के मुद्दे में शामिल प्रमुख राज्य: Punjab, Haryana, और Uttar Pradesh।

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