दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि वयस्कों के बीच सहमति से बने संबंधों को पूर्वव्यापी रूप से यौन हमला नहीं कहा जा सकता
दिल्ली हाई कोर्ट ने टिप्पणी की है कि जब दो वयस्क सहमति से यौन संबंध बनाते हैं या साथ रहने का विकल्प चुनते हैं, तो उन्हें उस निर्णय के परिणामों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। जस्टिस Swarana Kanta Sharma ने कहा कि कोई पक्ष रिश्ता खराब होने के बाद उसे पूर्वव्यापी रूप से (retrospectively) यौन हमले का नाम नहीं दे सकता। अदालत ने एक व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार के मामले को रद्द कर दिया, जहां शिकायतकर्ता ने शादी के झूठे वादे के तहत यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था। अदालत ने नोट किया कि शिकायतकर्ता शुरू से ही व्यक्ति की विवाहित स्थिति से अवगत थी, जो दर्शाता है कि संबंध सहमति से था।
मुख्य बिंदु
- सहमति से संबंध बनाने वाले वयस्कों को अपने विकल्पों के परिणामों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
- ब्रेकअप के बाद रिश्तों को पूर्वव्यापी रूप से यौन हमले के अपराध के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता है।
- अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि साथी की वैवाहिक स्थिति के बारे में जागरूकता 'शादी के झूठे वादे' के दावों को नकारती है।
परीक्षा तथ्य
- Justice Swarana Kanta Sharma
- Delhi High Court judgment (September 10)
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