UAPA Section 43D(5) की न्यायिक समीक्षा और 'सजा के रूप में प्रक्रिया' का सिद्धांत
Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) के तहत कार्यकर्ताओं की जमानत के संबंध में चल रही कानूनी लड़ाई लंबी प्री-ट्रायल हिरासत पर चिंता व्यक्त करती है। UAPA की Section 43D(5) जमानत को लगभग असंभव बना देती है यदि अदालत को आरोप 'prima facie true' लगते हैं, जो कि सुप्रीम कोर्ट के Watali (2019) के फैसले से और कड़ा हो गया है। आलोचकों का तर्क है कि यह ढांचा कानूनी प्रक्रिया को ही सजा का एक रूप बनने की अनुमति देता है, खासकर जब मुकदमों में वर्षों की देरी होती है। लेख इस बात पर जोर देता है कि Articles 19 और 21 के तहत स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी को राज्य के अतिरेक और आतंकवादी कृत्यों की अस्पष्ट परिभाषाओं से सुरक्षित किया जाना चाहिए।
मुख्य बिंदु
- UAPA की Section 43D(5) जमानत पर रोक लगाती है यदि यह मानने के उचित आधार हैं कि आरोप 'prima facie true' हैं।
- सुप्रीम कोर्ट का Watali फैसला (2019) जमानत के चरण में सबूतों की विस्तृत जांच को प्रतिबंधित करता है, जो अभियोजन पक्ष के पक्ष में होता है।
- बिना मुकदमे के लंबी कैद को तेजी से भारतीय संविधान के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
- लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को बनाए रखने और राज्य के अतिरेक को रोकने के लिए वैध विरोध और आतंकवादी गतिविधि के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।
परीक्षा तथ्य
- UAPA की Section 43D(5) आतंकवाद से संबंधित अपराधों के लिए जमानत प्रावधानों को नियंत्रित करती है।
- संविधान के Articles 19 और 21 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट का Watali फैसला 2019 में सुनाया गया था।
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