SC जजों का कहना है कि State Governors Bills पर सहमति देने में अनिश्चित काल तक देरी नहीं कर सकते
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने एक Presidential Reference की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि Governors राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित Bills को अनिश्चित काल तक रोक कर नहीं रख सकते। कोर्ट ने जोर दिया कि कोई भी अंग Constitution के कामकाज या विधायिका की बुद्धिमत्ता को बाधित नहीं कर सकता। यह 8 अप्रैल के Tamil Nadu Governor से संबंधित फैसले के बाद आया है, जिसमें तीन महीने की समय सीमा का सुझाव दिया गया था। बेंच इस बात पर बहस कर रही है कि क्या समय सीमा चूकने पर 'deemed assent' लागू होनी चाहिए। Centre ने तर्क दिया कि Article 200 के तहत Governors के पास पूर्ण शक्ति है, जबकि States का तर्क है कि ऐसी देरी संवैधानिक योजना को विफल करती है।
मुख्य बिंदु
- Governors को तत्परता के साथ कार्य करना चाहिए और Republic में 'royalty' का दर्जा नहीं मान लेना चाहिए।
- Supreme Court इस बात की जांच कर रहा है कि क्या Bill पर सहमति के लिए संवैधानिक प्रमुखों पर तीन महीने जैसी सामान्य समय सीमा थोपी जा सकती है।
- Constitution का Article 200, Bill पर सहमति देने, रोकने या President के लिए आरक्षित करने की Governor की शक्ति को नियंत्रित करता है।
- कोर्ट ने नोट किया कि राज्यपाल की देरी संवैधानिक योजना और कानून बनाने के संप्रभु कार्य को विफल करती है।
परीक्षा तथ्य
- Indian Constitution का Article 200 Bills को सहमति देने की Governor की शक्ति से संबंधित है।
- Tamil Nadu Governor मामले में 2020 से 10 State Bills की सहमति में देरी शामिल थी।
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