असम का आक्रामक बेदखली अभियान पूर्वोत्तर में चिंता का कारण बना, सीमा विवाद और 'लैंड जिहाद' के नैरेटिव से जुड़ा
असम के वन भूमि से आक्रामक बेदखली अभियान, जो मुख्य रूप से बंगाली मुसलमानों को लक्षित कर रहा है, ने पड़ोसी राज्यों में चिंता पैदा कर दी है, जो विस्थापित लोगों के influx से डरते हैं और अपनी सीमा नियंत्रण को मजबूत कर रहे हैं। 'बांग्लादेशी' या 'अवैध घुसपैठिया' के नैरेटिव द्वारा तैयार किए गए इन बेदखलियों के कारण मौतें और महत्वपूर्ण विस्थापन हुआ है। असम के Arunachal Pradesh, Meghalaya, Mizoram और Nagaland के साथ भी लंबे समय से सीमा विवाद हैं, जिसमें लगभग 83,000 हेक्टेयर भूमि का दावा किया गया है। ये राज्य असम पर "अवैध अप्रवासियों" को संरक्षण देने और विवादित भूमि पर दावा करने के लिए उन्हें सीमाओं के किनारे बसाने का आरोप लगाते हैं। Gauhati High Court ने पांच राज्यों को वन भूमि से अवैध बस्तियों को हटाने के प्रयासों के समन्वय के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने का निर्देश दिया है।
मुख्य बिंदु
- असम सरकार वन भूमि से आक्रामक बेदखली अभियान चला रही है, जो मुख्य रूप से बंगाली मुसलमानों को लक्षित कर रहा है।
- पड़ोसी राज्य विस्थापित लोगों के influx को लेकर चिंतित हैं और अपनी सीमा निगरानी को मजबूत कर रहे हैं।
- बेदखली असम के Arunachal Pradesh, Meghalaya, Mizoram और Nagaland के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों से जुड़ी हैं।
- 'अवैध घुसपैठिए' और 'लैंड जिहाद' का नैरेटिव इन बेदखलियों को उचित ठहराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप विस्थापन और मौतें हुई हैं।
- Gauhati High Court ने पांच राज्यों को अवैध बस्तियों को संबोधित करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति स्थापित करने का निर्देश दिया है।
परीक्षा तथ्य
- सीमा विवादों में शामिल राज्य: असम, Arunachal Pradesh, Meghalaya, Mizoram, Nagaland।
- असम द्वारा दावा की गई भूमि: लगभग 83,000 हेक्टेयर।
- न्यायालय का निर्देश: Gauhati High Court ने 30 जुलाई को राज्यों को एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने का निर्देश दिया।
- 'अवैध अप्रवासियों' के लिए Assam Accord की कट-ऑफ तिथि: 24 मार्च, 1971 की मध्यरात्रि।
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