राष्ट्रपति और राज्यपालों की शक्तियों के संबंध में राष्ट्रपति के संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र को नोटिस जारी किया
मुख्य न्यायाधीश B.R. Gavai की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट ने एक Presidential Reference के संबंध में सभी राज्यों और केंद्र सरकार को औपचारिक नोटिस जारी किए हैं। यह संदर्भ राज्य विधेयकों को सहमति देने में राष्ट्रपति और राज्यपालों की शक्तियों पर स्पष्टता चाहता है, जो पूरे देश को प्रभावित करने वाला मामला है। अदालत इस बात पर सवालों का समाधान करेगी कि क्या न्यायिक शक्तियां Articles 200 और 201 के तहत इन संवैधानिक प्राधिकरणों पर समय-सीमा लगाने तक विस्तारित होती हैं, और संवैधानिक शक्तियों को प्रतिस्थापित करने में Article 142 का दायरा क्या है। यह एक पिछले फैसले के बाद आया है जहां अदालत ने विधेयकों को सहमति देने में देरी के लिए राज्यपाल के कार्यों को अवैध माना था।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति और राज्यपालों की शक्तियों से संबंधित एक Presidential Reference पर सभी राज्यों और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए हैं।
- यह संदर्भ राज्य विधेयकों को सहमति देने के लिए समय-सीमा लगाने और Article 142 के तहत न्यायिक शक्तियों के विस्तार पर स्पष्टता चाहता है।
- यह मुद्दा सभी राज्यों और पूरे देश को प्रभावित करता है, और सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति के सवालों का जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध है।
- अदालत जांच करेगी कि क्या राष्ट्रपति/राज्यपालों की संवैधानिक शक्तियों को Article 142 के तहत न्यायिक आदेशों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
परीक्षा तथ्य
- संविधान के Article 143 के तहत Presidential Reference किया गया।
- Articles 200 और 201 विधेयकों को राज्यपालों द्वारा सहमति देने या रोकने की प्रक्रिया से संबंधित हैं।
- Article 142 सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक कोई भी डिक्री या आदेश पारित करने की शक्ति प्रदान करता है।
- पीठ में मुख्य न्यायाधीश B.R. Gavai, जस्टिस Surya Kant, Vikram Nath, P.S. Narasimha, और A.S. Chandurkar शामिल थे।
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