वैश्विक शिपिंग डीकार्बोनाइज (decarbonise) करने की कोशिश कैसे कर रहा है? हरित ईंधन, चुनौतियाँ और भारत की भूमिका

वैश्विक शिपिंग का लक्ष्य 2040-50 तक डीकार्बोनाइजेशन (decarbonisation) है, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। उद्योग Very Low Sulphur Fuel Oil (VLSFO) और LNG जैसे पारंपरिक ईंधनों से हरित विकल्पों जैसे green ammonia और e-methanol की ओर बढ़ रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के माध्यम से उत्पादित green hydrogen मूलभूत है, जिसमें green ammonia को शिपिंग में इसकी स्थिरता के लिए पसंद किया जाता है। भारत को अपनी सौर ऊर्जा क्रांति और नीतिगत ढाँचों का लाभ उठाते हुए समुद्री हरित ईंधन उत्पादन केंद्र बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। चुनौतियों में उच्च प्रारंभिक पूंजी लागत, मूल्य विसंगतियाँ और प्रमुख प्रौद्योगिकियों के लिए आयात पर निर्भरता शामिल है। लेख इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभिनव वित्तीय साधनों, PLI योजनाओं, CCUS प्रोत्साहनों और हरित जहाज निर्माण के लिए मांग-पक्ष समर्थन का सुझाव देता है।

मुख्य बिंदु

  • वैश्विक शिपिंग 2040-50 तक डीकार्बोनाइजेशन (decarbonisation) के लिए प्रतिबद्ध है, जो पारंपरिक ईंधनों से green ammonia और e-methanol जैसे हरित विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा (renewable power) से प्राप्त Green hydrogen प्रमुख प्रवर्तक है, जिसमें green ammonia स्वयं हाइड्रोजन की तुलना में शिपिंग के लिए अधिक स्थिर और व्यावहारिक ईंधन है।
  • भारत के पास अपनी सफल सौर ऊर्जा क्रांति के आधार पर समुद्री हरित ईंधन उत्पादन के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
  • चुनौतियों में हरित ईंधनों की उच्च लागत, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिए आयात पर निर्भरता और पर्याप्त निवेश और नीतिगत समर्थन की आवश्यकता शामिल है।
  • नीतिगत सिफारिशों में अभिनव वित्तीय साधन, Production-Linked Incentive (PLI) योजनाएं, Carbon Capture, Utilisation, and Storage (CCUS) प्रोत्साहन और हरित जहाज निर्माण के लिए मांग-पक्ष समर्थन शामिल हैं।

परीक्षा तथ्य

  • वैश्विक शिपिंग के लिए डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्य: 2040-50।
  • वर्तमान प्राथमिक ईंधन: Very Low Sulphur Fuel Oil (VLSFO), डीजल, मीथेन गैस (LNG)।
  • भविष्य के हरित ईंधन: Green ammonia, green या e-methanol, biofuels।
  • भारत की सौर क्षमता वृद्धि: 2.82 GW से 105 GW (2014-2025)।
  • सरकारी सहायता: जहाज खरीद के लिए $10 बिलियन का वादा।

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