हिमालय में तेजी से हो रहे कटाव से CO2 का छिपा हुआ स्रोत उजागर: अध्ययन
IISER पुणे और वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी के हालिया शोध से पता चलता है कि हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं में तेजी से होने वाला कटाव वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की महत्वपूर्ण मात्रा उत्सर्जित करता है। हालांकि सिलिकेट अपक्षय (वेदरिंग) आमतौर पर लाखों वर्षों में कार्बन सिंक के रूप में कार्य करता है, लेकिन खुले चट्टानों में सल्फाइड्स का ऑक्सीकरण CO2 उत्सर्जन को तेज करता है। यह खनिज अपक्षय के शीतलन प्रभाव का मुकाबला करता है, जो वैश्विक कार्बन चक्र में पहाड़ी क्षेत्रों की जटिल भूमिका को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु
- हिमालय में तेजी से होने वाला कटाव सल्फाइड्स को उजागर करता है जो ऑक्सीकृत होकर वातावरण में CO2 छोड़ते हैं।
- सिलिकेट अपक्षय पारंपरिक रूप से लंबे भूवैज्ञानिक समयमान पर कार्बन सिंक के रूप में कार्य करता है।
- ग्लेशियर से पोषित जलग्रहण क्षेत्रों में सल्फाइड ऑक्सीकरण कार्बन उत्सर्जन को तेज करता है, जो शीतलन प्रभावों का मुकाबला करता है।
- निष्कर्ष बताते हैं कि पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्र कार्बन डाइऑक्साइड के महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक स्रोत हैं।
परीक्षा तथ्य
- IISER पुणे और वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया।
- यह अध्ययन केमिकल जियोलॉजी में प्रकाशित हुआ था।
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