भारत के लोकतंत्र को विविध चुनावी लय की आवश्यकता है, 'One Nation, One Election' प्रस्ताव की आलोचना

'One Nation, One Election (ONOE)' प्रस्ताव को भारत की federal structure और democratic accountability के लिए खतरा बताया गया है। संसदीय प्रणाली की अंतर्निहित लचीलापन, जहाँ सरकारें विधायिका के प्रति जवाबदेह होती हैं, ONOE के कठोर, निश्चित-अवधि के दृष्टिकोण के विपरीत है। आलोचकों का तर्क है कि ONOE क्षेत्रीय विकल्पों को राष्ट्रीय गतिशीलता के अधीन करके federalism को कमजोर करेगा, चुनावी जनादेश को विकृत करेगा और 'lame-duck' प्रशासन बनाएगा। ONOE के लिए आर्थिक तर्कों को भी चुनौती दी जाती है, जिसमें दावा किया जाता है कि अभियान खर्च informal economy को उत्तेजित करता है और Model Code of Conduct दुरुपयोग को रोकता है, न कि नियमित शासन पक्षाघात को।

मुख्य बिंदु

  • 'One Nation, One Election' (ONOE) प्रस्ताव को federalism और democratic accountability को कमजोर करने वाला माना जाता है।
  • संसदीय प्रणाली में स्वाभाविक रूप से चुनावी लय में लचीलेपन की आवश्यकता होती है, जो fixed-term presidential systems से भिन्न है।
  • ONOE से कार्यकाल छोटे हो सकते हैं और 'lame-duck' सरकारें बन सकती हैं, जिससे स्थिरता और दीर्घकालिक नीति-निर्माण कमजोर होगा।
  • राज्य और राष्ट्रीय चुनावों को एक साथ जोड़ने से स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय आख्यानों से दब सकते हैं, जिससे मतदाता विकल्पों में विकृति आ सकती है।
  • ONOE के लिए आर्थिक तर्कों पर सवाल उठाया जाता है, जिसमें अभियान खर्च को बोझ के बजाय एक आर्थिक प्रोत्साहन के रूप में देखा जाता है।

परीक्षा तथ्य

  • प्रस्ताव: 'One Nation, One Election' (ONOE)
  • लेख के लेखक: Shashi Tharoor (चौथी बार के MP, Thiruvananthapuram)
  • ऐतिहासिक चुनाव समयरेखा: 1952-1967 (synchronised elections)
  • नियामक ढांचा: Model Code of Conduct
  • संवैधानिक तंत्र: President's Rule / State of Emergency

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