प्रस्तावित Food Security Act संशोधन सबसे गरीबों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे खाद्य असुरक्षा बढ़ सकती है

National Food Security Act (NFSA) में प्रस्तावित संशोधन सबसे गरीब परिवारों को उनके हक को कम करके और खाद्य असुरक्षा बढ़ाकर काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि 2011 की जनगणना पर आधारित वर्तमान पात्रता मानदंड पहले से ही कई कमजोर परिवारों को बाहर करते हैं। आगे के संशोधन, जैसे प्रति व्यक्ति खपत से हक को जोड़ना या लाभार्थियों की संख्या को कम करना, भूख और कुपोषण को बढ़ाएगा, खासकर महिलाओं और बच्चों में। आलोचकों का तर्क है कि सरकार को खाद्य सुरक्षा प्रावधानों का विस्तार करना चाहिए, न कि उन्हें कम करना चाहिए, लगातार गरीबी और एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा जाल की आवश्यकता को देखते हुए। प्रस्तावित परिवर्तनों को सार्वभौमिक खाद्य सुरक्षा से दूर जाने के कदम के रूप में देखा जाता है।

मुख्य बिंदु

  • NFSA में प्रस्तावित संशोधन सबसे गरीबों के लिए खाद्य हक को कम करने और खाद्य असुरक्षा बढ़ाने की धमकी देते हैं।
  • 2011 की जनगणना पर आधारित वर्तमान पात्रता मानदंड पहले से ही कई कमजोर परिवारों को बाहर करते हैं।
  • प्रति व्यक्ति खपत से हक को जोड़ना या लाभार्थियों की संख्या को कम करना भूख और कुपोषण को बदतर बना देगा।
  • आलोचक सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करने के लिए खाद्य सुरक्षा प्रावधानों का विस्तार करने की वकालत करते हैं, न कि उन्हें कम करने की।

परीक्षा तथ्य

  • लेख National Food Security Act (NFSA) पर चर्चा करता है।
  • पात्रता मानदंड वर्तमान में 2011 की जनगणना पर आधारित हैं।
  • जीन ड्रेज़ और मोहम्मद सज्जाद को विश्लेषण के लेखकों के रूप में उल्लेख किया गया है।
  • प्रस्तावित संशोधन प्रति व्यक्ति खपत को प्रति व्यक्ति प्रति माह 1kg तक कम कर सकता है।

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