ग्लोबल वार्मिंग में तेजी: नए अध्ययन से तेज वार्मिंग दर का खुलासा
Geophysical Research Letters में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चलता है कि ग्लोबल वार्मिंग में तेजी आ रही है, जिसमें पृथ्वी पिछले दशक में किसी भी पिछले दशक की तुलना में तेजी से गर्म हो रही है। ज्वालामुखी विस्फोट और सौर गतिविधि जैसे प्राकृतिक कारकों को सांख्यिकीय रूप से हटाने से, शोधकर्ताओं ने 2015 के आसपास शुरू हुई वार्मिंग दर में एक महत्वपूर्ण उछाल पाया। यह त्वरित गति बताती है कि पृथ्वी 2030 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग सीमा को पार कर जाएगी, जो पहले की तुलना में बहुत पहले है। जबकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्राथमिक कारण बना हुआ है, एक योगदान कारक Aerosols द्वारा प्रदान किए गए "Cooling Mask" का गायब होना है, क्योंकि वायु प्रदूषण कम हो गया है।
मुख्य बिंदु
- ग्लोबल वार्मिंग में तेजी आ रही है, जिसमें पृथ्वी पिछले दशक में पहले से कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रही है।
- सांख्यिकीय विश्लेषण ने 2015 के आसपास वार्मिंग दर में एक महत्वपूर्ण उछाल को उजागर करने के लिए प्राकृतिक जलवायु परिवर्तनशीलता को हटा दिया।
- त्वरित गति बताती है कि 1.5 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग सीमा 2030 तक पार हो जाएगी।
- कम वायु प्रदूषण और Aerosols से "Cooling Mask" का गायब होना तेजी से वार्मिंग में योगदान करते हैं।
- Greenhouse Gas Emissions ग्लोबल वार्मिंग का प्राथमिक चालक बना हुआ है।
परीक्षा तथ्य
- अध्ययन Geophysical Research Letters में प्रकाशित हुआ था।
- वार्मिंग दर 2015 के आसपास उछली।
- पृथ्वी के 2030 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग को पार करने का अनुमान है।
- Aerosols ने ऐतिहासिक रूप से सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके एक "Cooling Mask" प्रदान किया।
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