पचास साल पहले, भारत ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बकरी प्रजनन की एक नई रणनीति शुरू की थी।
अगस्त 3, 1976 का यह पुरालेख Indian Council of Agricultural Research (ICAR) द्वारा शुरू की गई एक नई बकरी प्रजनन योजना पर रिपोर्ट करता है। इस योजना का उद्देश्य मांस, दूध और ऊन जैसे बकरी उत्पादों की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार करना था, जिससे ग्रामीण आबादी, विशेष रूप से भूमिहीन मजदूरों और छोटे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। इसमें स्वदेशी बकरियों का विदेशी नस्लों के साथ क्रॉस-ब्रीडिंग और विभिन्न राज्यों में अनुसंधान इकाइयों की स्थापना शामिल थी। यह पहल ग्रामीण भारत में आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए पशुधन का लाभ उठाने के एक रणनीतिक प्रयास को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु
- ICAR द्वारा 1976 में बकरी उत्पादकता में सुधार के लिए एक नई बकरी प्रजनन योजना शुरू की गई थी।
- इस योजना का उद्देश्य बकरियों से मांस, दूध और ऊन उत्पादन को बढ़ाकर ग्रामीण आय को बढ़ावा देना था।
- इसमें स्वदेशी बकरियों का विदेशी नस्लों के साथ क्रॉस-ब्रीडिंग और अनुसंधान इकाइयों की स्थापना शामिल थी।
- यह पहल आर्थिक उत्थान के लिए भूमिहीन मजदूरों और छोटे किसानों को लक्षित करती थी।
परीक्षा तथ्य
- यह योजना 3 अगस्त, 1976 को शुरू की गई थी।
- इसे Indian Council of Agricultural Research (ICAR) द्वारा लागू किया गया था।
- Himachal Pradesh, Uttar Pradesh, Rajasthan और Andhra Pradesh में अनुसंधान इकाइयां स्थापित की गईं।
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