भूस्खलन के प्रति भारत की भेद्यता और शमन रणनीतियों की आवश्यकता
भारत भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, खासकर मानसून के मौसम में, जिसमें Western Ghats और Himalayas विशेष रूप से अतिसंवेदनशील हैं। यह लेख इस भेद्यता का श्रेय भूवैज्ञानिक कारकों, वनों की कटाई और निर्माण जैसी मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के संयोजन को देता है। यह मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, व्यापक भूमि-उपयोग नियोजन और प्रभावी शमन उपायों की आवश्यकता पर जोर देता है। यह लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि जबकि कुछ राज्यों ने प्रगति की है, इन आवर्ती प्राकृतिक आपदाओं से जान और माल के नुकसान को कम करने के लिए एक राष्ट्रीय, एकीकृत दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु
- भारत भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, विशेष रूप से मानसून के दौरान Western Ghats और Himalayan क्षेत्रों में।
- कारणों में भूवैज्ञानिक कारक, वनों की कटाई और निर्माण जैसी मानवीय गतिविधियाँ और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं।
- भूस्खलन के जोखिमों को कम करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और व्यापक भूमि-उपयोग नियोजन महत्वपूर्ण हैं।
- 'Landslide Atlas of India' कमजोर क्षेत्रों की पहचान के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
- भूस्खलन से जान और माल के नुकसान को कम करने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
परीक्षा तथ्य
- 'Landslide Atlas of India' 1.88 लाख भूस्खलन-प्रवण स्थलों की पहचान करता है।
- Geological Survey of India (GSI) भूस्खलन मानचित्रण और मूल्यांकन में शामिल है।
- Western Ghats और Himalayas प्रमुख भूस्खलन-प्रवण क्षेत्र हैं।
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